मुख्यमंत्री पद छोड़ने से मजबूरी, केजरीवाल को नया घर ढूंढना जरूरी
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घर की तलाश है। वह नवरात्रि में मुख्यमंत्री का फ्लैगस्टाफ रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने जा रहे हैं। अब सवाल है कि वह रहेंगे कहां? इस सवाल के जवाब के जवाब में 'निशानेबाज' क्या कुछ कहते हैं पढ़िए इस आर्टिकल में।
- Written By: मृणाल पाठक
(डिजाइन फोटो)
पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घर की तलाश है। वह नवरात्रि में मुख्यमंत्री का फ्लैगस्टाफ रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने जा रहे हैं। अब सवाल है कि वह रहेंगे कहां?’’
हमने कहा, ‘‘कोई भी लोकप्रिय नेता जनता के दिलों में रहता है। उसके चहेते उसे अपने हृदय की गहराइयों में बसा लेते हैं ताकि उसका दीदार या दर्शन आसानी से हो सके। आपने शेर सुना होगा- जब जरा गर्दन झुकाई, देख ली तस्वीर-ए-यार।’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, इस समस्या को जरा गंभीरता से लीजिए। केजरीवाल सरकारी आवास से बेदखल होने के बाद कहां रहेंगे? उन्हें सिर छुपाने के लिए छत कहां नसीब होगी?’’
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हमने कहा, ‘‘केजरीवाल और उनकी पत्नी सुनीता दिल्ली में घूमकर घर की तलाश कर सकते हैं। आपने अमोल पालेकर व जरीना वहाब की पुरानी फिल्म ‘घरोंदा’ का गाना सुना होगा- दो दिवाने शहर में, रात या दोपहर में, आशियाना ढूंढ़ते हैं, एक आबोदाना ढूंढ़ते हैं! केजरी को मकान मेन रोड में न मिल पाए तो किसी गली-कूचे में मिल जाएगा। एक गीत है- जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा उस गली में हमें पांव रखना नहीं, जो डगर तेरे द्वारे पे जाती ना हो, उस डगर से हमें तो गुजरना नहीं।’’
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पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, इतनी खटपट की क्या जरूरत है? केजरीवाल के लिए नया घर खोजने की जिम्मेदारी दिल्ली की नई मुख्यमंत्री आतिशी को लेनी चाहिए। ऐसा मकान दिलवाएं जहां दिवाली में केजरीवाल जमकर आतिशबाजी कर सकें।’’
हमने कहा, ‘‘यह इतना आसान नहीं है। दिल्ली के असली मालिक एलजी या उपराज्यपाल वीके सक्सेना यदि लोगों को मना कर दें कि केजरी को मकान मत दो तो किसकी हिम्मत है जो उन्हें मकान प्रोवाइड करे। केजरीवाल जमानत पर बाहर हैं। यदि फिर से जेल चले गए तो मकान का किराया कौन देगा?’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, किराए का अपार्टमेंट या बंगला लेने की क्या जरूरत। केजरीवाल को नई मुख्यमंत्री आतिशी का मार्गदर्शन करने के लिए उनके करीब रहना पड़ेगा। इसलिए वह कह सकते हैं- इक घर बनाऊंगा तेरे घर के सामने, दुनिया बसाऊंगा तेरे घर के सामने! जब तक घर नहीं मिलता वे अपने बनाए हुए किसी स्कूल या मोहल्ला क्लीनिक में रह सकते हैं।’’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा
