

लेख में एआई के बढ़ते प्रभाव और मानव बुद्धि के महत्व पर चर्चा की गई है।
एआई को इंसान का सहयोगी औजार मानने, न कि उसका विकल्प बनाने की सलाह दी गई है।
डीप ब्लू और शतरंज का उदाहरण देकर बताया गया है कि तकनीक से इंसानी कौशल भी बेहतर हो सकता है।
एआई से चिकित्सा और विज्ञान में नई संभावनाओं की उम्मीद जताई गई है।
Artificial Intelligence and Human Creativity: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, अपनी अक्ल को ताला लगा दीजिए, क्योंकि अब जमाना एआई या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। जब सारा काम एआई कर दे तो खुद का दिमाग खपाने की क्या जरूरत है! इंसान पैसेंजर ट्रेन के समान पीछे छूटता जा रहा है जबकि एआई बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे दौड़ रही है।'
हमने कहा, 'इस बात को याद रखिए कि इंसान ने एआई को बनाया है, एआई ने इंसान को नहीं! मनुष्य ही सृजनकर्ता है। एआई को सिर्फ अपनी सुविधा का औजार समझना चाहिए। उसे मानव की बुद्धि पर हावी होने का मौका नहीं देना है।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हाल ही में ओपन एआई ने दावा किया कि उसके एआई मॉडेल्स ने प्रसिद्ध नेवियर स्टोक्स प्रॉब्लम हल कर लिया जिसे बड़े बड़े गणितज्ञ हल नहीं कर पाए थे। इसे हल करने पर लाखों डॉलर का इनाम था।'
हमने कहा, 'बड़े बड़े गणितज्ञों ने जो मेहनत की, उसकी बुनियाद पर ही आगे बढ़कर एआई ने इस प्रॉब्लम को सुलझाया था। एआई के तुरंत नतीजा देने की क्षमता, इंसान के प्रयासों का महत्व कम नहीं करती। कोई व्यक्ति हेलीकाप्टर से जाकर पर्वत शिखर के समीप उतर जाए, तो यह मशीन की उपलब्धि है, लेकिन कोई पर्वतारोही कठिन प्रयास, खराब मौसम, बर्फीले तूफान और भारी ठंड के बावजूद अप्रतिम साहस और धैर्य से पहाड़ की चोटी पर चढ़ जाए, तो उसी की सराहना होगी।
शतरंज के खेल में आईबीएम के सुपर कंप्यूटर डीप ब्लू ने तत्कालीन विश्व शतरंज चैम्पियन गैरी कास्पारोव को हरा दिया। इसे मशीन की मानव बुद्धि पर विजय माना गया, लेकिन इसकी वजह से शतरंज का खेल बंद नहीं हुआ, बल्कि एआई पावर वाले चेस इंजिन से खिलाड़ी नई चालें सीखने लगे।'
हमने कहा, 'विज्ञान इंसान के संघर्षों को कम कर आसान जिंदगी देने लगा है। 250 साल पहले तक लोग लंबी यात्रा पैदल, बैलगाड़ी या घोड़े पर किया करते थे। आज फ्लाइंग कार का ईजाद हो गया है। तीर, तलवार, भाले की जगह मिसाइल और ड्रोन आ गए। 25 साल पहले स्मार्टफोन और इंटरनेट के बारे में कौन जानता था! यदि एआई मानव की आयु बढ़ाने तथा कैंसर, पारकिंसंस डिसीज जैसे जटिल रोगों का अचूक इलाज खोज ले तो मेडिकल साइंस कितना आगे बढ़ जाएगा। एआई को अपना सहयोगी मित्र बनाइए लेकिन उसका गुलाम मत बनिए।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा