Navabharat Nishanebaaz: राम ने धोए थे निषादराज के पैर ! अमित शाह का कथन बेसिर-पैर

Amit Shah Ramayana: दिल्ली में अमित शाह के निषादराज संबंधी बयान पर बहस छिड़ गई है। रामायण प्रसंग को लेकर उनके कथन और प्रचलित कथा में अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
Navabharat Nishanebaaz: Ram Washed Nishadraj's Feet! Amit Shah's Statement Is Baseless.
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Amit Shah Nishadraj Remark: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, दिल्ली के जनजातीय सांस्कृतिक समागम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि जो लोग हमें बांटना चाहते हैं वे यह नहीं जानते कि जब निषादराज ने मदद का हाथ बढ़ाया, तो भगवान श्रीराम ने स्वयं निषादराज के पैर गंगाजल से धोकर वनवासियों का सम्मान किया था। शाह का यह कथन हैरत में डाल देता है। उन्होंने सरासर गलत व उल्टी बात कही है, जो किसी भी रामायण में नहीं है।

निषादराज या केवट ने राम, सीता व लक्ष्मण को अपनी नाव से गंगा पार कराने के पहले शर्त रखी थी कि राम पहले उससे अपने चरण धुलवा लें तभी वह उन्हें नाव में बिठाएगा। केवट का कहना था कि जब आपके चरणस्पर्श से पत्थर की शिला नारी बन गई तो मेरी नाव भी कहीं नारी न बन जाए।

फिर मेरी रोजी-रोटी कैसे चलेगी! वह कठौते में पानी भरकर लाया और राम के चरण अच्छी तरह पखारे इसके बाद ही उन्हें नाव में बिठाया। जब गंगा पार करने के बाद राम उसे उतराई (पारिश्रमिक) के रूप में अपनी अंगूठी देने लगे तो उनसे लेने से मना करते हुए कहा कि एक भाई दूसरे भाई से उतराई कैसे ले सकता है? मैंने यहां आपको पार करवाया। मरने के बाद आप मुझे भवसागर से पार लगा देना।"

हमने कहा, 'अमित शाह राजनेता हैं, धार्मिक प्रवचनकार नहीं। उन्हें रामायण पढ़ने की फुरसत ही कहां है? जैसा मन में आया, कह दिया। विद्वता और मंत्री पद का आपस में कोई रिश्ता नहीं है। उनका आशय था कि लोगों को लालच देकर धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। संविधान निर्माताओं ने हर व्यक्ति को अपने मूल धर्म में आत्मसम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है, हमें धर्म की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए।"

पड़ोसी ने कहा, 'आशय अपनी जगह है लेकिन उदाहरण हमेशा सही देना चाहिए, नहीं मालूम तो चुप रहना चाहिए, शाह ने अनूप जलोटा का भजन सुना होता तो उन्हें वास्तविकता पता होती। इस भजन के बोल हैं- कभी-कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े, जाना था गंगा पार, प्रभु केवट की नाव चढ़े। एक अन्य भजन है- मेरी छोटी सी ये नाव तेरे जादू भरे पांव, मोहे डर लागे राम, कैसे बिठाऊं तुम्हें नाव में। अमित शाह चाहें तो यू-ट्यूब पर यह भजन सुन लें। उन्हें समझ में आ जाएगा कि किसने किसके चरण धोए।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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