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नवभारत संपादकीय: राजनीति का पुराना टकराव फिर चर्चा में, गन लॉबी के दबाव में अमेरिकी नेतृत्व

America Gun Violence: अमेरिका में गन कल्चर, हथियार लॉबी और राजनीतिक हिंसा पर बहस फिर तेज हुई है। आत्मरक्षा अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Apr 29, 2026 | 07:39 AM

अमेरिका गन कल्चर,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)

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US Gun Lobby Influence: अमेरिका का गन कल्चर शायद कभी खत्म नहीं होगा, क्योंकि वहां का संविधान किसी को भी आत्मरक्षा के लिए मनचाहा हथियार खरीदने का अधिकार देता है। दूसरी खास बात यह है कि वहां राजनीतिक नेतृत्व पर गन लॉबी का हमेशा से जबरदस्त दबाव रहा है। हथियार निर्माता कंपनियां बिल्कुल नहीं चाहती कि बंदूकों की बिक्री पर कोई रोक-टोक लगे, जो कि अरबों डॉलर का कारोवार है। अमेरिका में हर 100 नागरिकों के पास 120 रिवॉल्वर, हैंडगन या राइफल है।

देशवासियों के पास लगभग 40 करोड बंदूकें होने का अनुमान लगाया जाता है। अमेरिका में अब्राहम लिंकन से लेकर जॉन एफ केनेडी जैसे राष्ट्रपतियों की गोली मारकर हत्या की गई। ट्रंप पर चुनाव अभियान के दौरान गोली चली थी, जो उनके कान के एकदम करीब से गुजर गई थी। अब उन पर फिर ऐसा संकट आया, जब वह वॉशिंगटन डीसी के हिल्टन होटल के व्हाइट हाउस कवर करने वाले पत्रकारों को भोज दे रहे थे।

फायरिंग करते हुए आ रहे उस हमलावर से डोनाल्ड ट्रंप को सीक्रेट सर्विस एजेंटों ने बचा लिया। कोल टॉमस एलन नामक हमलावर पहले से उस होटल में कमरा लेकर रह रहा था और उसने पहले ही शत्र लाकर रखे थे। अमेरिका की बंदूक संस्कृति की जड़े 250 वर्ष से भी ज्यादा पुरानी हैं। यूरोप के विभिन्न देशों से आकर वहां बसे लोगों ने अमेरिका के मूल निवासी रेड इंडियन या नवाजो ट्राइब के लोगों का जानवरों की भांति शिकार किया, जिन लोगों ने क्लिंट इंस्टवुड की काऊब्वाय फिल्में देखी होंगी, उन्होंने 18 वीं सदी में शेरिफ की भूमिका, हथियारबंद गिरोहों की खूनी लड़ाई का रोमांच महसूस किया होगा।

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सभ्य समाज के इस दौर में भी विकृत मानसिकता वाले हिंसक व सिरफिरे लोग स्कूल में जाकर गोलीबारी करने से बाज नहीं आते। हेट क्राइम के तहत गुरुव्दारे व अन्य धर्मस्थलों पर भी गोली चलाने की घटनाएं हुई हैं। अमेरिका में कू क्लक्स क्लान और डॉट बाटर जैसे हिंसक गिरोह रहे हैं। एक समय शिकागो शहर गोलीबारी व माफिया गिरोहों के लिए चर्चित था।

मुद्दा यह भी है कि लोग अपने यहां बंदूक या रिवॉल्वर क्यों रखते हैं? इसकी एक वजह असुरक्षा की भावना व डर है। अमेरिका में ज्यादातर जंगल हैं और मकानों के बीच काफी दूरी है। पार्क भी कई एकड़ में फैले हैं। यह संभव नहीं कि कोई पड़ोसी तुरंत मदद के लिए आ जाए। अधिकांश लोग अकेले रहते हैं।

यह भी पढ़ें:-नवभारत विशेष: बीमारी और काम के बोझ से दबे पुलिसकर्मी, कैसे कर पाएंगे अपराध नियंत्रण ?

ऐसे में वहां किसी बाहरी व्यक्ति को शक की निगाह से देखा जाता है। मेलमैन (डाकिया) भी जब पार्सल रखकर बहुत दूर चला जाए, तब लोग दरवाजा खोलकर पार्सल उठाते हैं। बिना अपॉइंटमेंट लिए कोई किसी से मिल नहीं सकता। अनजान लोगों को कोई लिफ्ट नहीं देता। रात में देर से ट्यूब (लोकल ट्रेन) से सफर करना खतरनाक होता है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

America gun culture political lobby violence debate public safety policy

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Published On: Apr 29, 2026 | 07:39 AM

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