नवभारत निशानेबाज: मुरली मनोहर ने पते की बात कही, हम पहले थे विश्वगुरु, अब नहीं

Murli Manohar Joshi Remark: बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर सवाल। जोशी के बयान ने ‘विश्वगुरु’ दावे पर नई बहस छेड़ी, अनुभव बनाम सक्रिय राजनीति पर चर्चा तेज।
Navbharat Sharpshooter: Murli Manohar Hits the Nail on the Head—We Were Once a 'Vishwa Guru', But No Longer.
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BJP Advisory Council Controversy: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, आपको याद होगा कि सक्रिय राजनीति से पूरी तरह रिटायर कर देने के लिए बीजेपी ने अपने 2 वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरलीमनोहर जोशी को परामर्शदाता मंडल में भेज दिया था। यह बीजेपी का एक तरह का वृद्धाश्रम है। आडवाणी 98 वर्ष और जोशी 92 वर्ष के हो चुके हैं।'

हमने कहा, 'लोग अपने घर और कुल की परंपराओं व रीतिरिवाजों के बारे में बड़े-बूढों से ही तो पूछते या परामर्श लेते हैं कि बताओ दादा ऐसी परिस्थिति में क्या करना चाहिए? बुजुर्गों का अनुभव और जवानों का जोश दोनों काम की चीज हैं।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, बीजेपी के परामर्शदाता पूरी तरह बैकग्राउंड या नेपथ्य में चले गाए, उनसे कोई परामर्श नहीं लेता। इसकी जरूरत भी महसूस नहीं की जाती, लेकिन अब एक परामर्शदाता मुरलीमनोहर जोशी ने बिना मांगे परामर्श दिया है और प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान में करेक्शन किया है कि भारत विश्वगुरु है। जोशी का कहना है कि भारत कभी विश्वगुरु था, लेकिन अब नहीं है। बीजेपी में रहकर मोदी के बयान को गलत बताना पानी में रहकर मगर से बैर करने के समान है।'

हमने कहा, 'ऐसा गर्मजोशीभरा बयान देकर डॉ. मुरलीमनोहर जोशी खतरों में आ गए, वरना लोग तो उन्हें भूल ही गए थे। राजनीति में उगते सूरज को सब सलाम करते हैं लेकिन डूबते सूरज को कोई नहीं देखता। जोशी का तात्पर्य समझिए, जब भारत विश्वगुरु था तो उसने समूची दुनिया को शून्य का आंकड़ा और दशमलव प्रणाली दी थी। हमारे वैज्ञानिक व गणितज्ञ आर्य भट्ट, वराहमिहिर, भास्कराचार्य, ब्रम्हगुप्त आदि थे। पाणिनी का व्याकरण आज तक पढ़ाया जाता है। मंडन मिश्र के यहां पले तोता-मैना संस्कृत में वार्तालाप करते थे। उनकी पत्नी भारती देवी सरस्वती का अवतार मानी जाती थी, जिन्होंने जगदगुरु आदि शंकराचार्य से शास्त्रार्थ किया था। हमारे देश में नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय थे, जहां पढ़ने विदेश से लोग आया करते थे। चाणक्य का अर्थशाख आज भी प्रसिद्ध है। आज हमारे 200 विश्वविद्यालयों में से कोई भी ऑक्सफोर्ड, कैर्मब्रज, हार्वर्ड, येल, स्टैनफोर्ड जैसी यूनिवर्सिटी की बराबरी नहीं करता। विदेशी आक्रमणकारियों ने नालंदा विश्वविद्यालय को जला दिया था, जहां इतने ग्रंथ थे कि 6 महीने तक आग जलती रही।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, जिस दुनिया में ट्रंप जैसे सनकी और ईरान जैसा अड़ियल हो और आतंकिस्तान का मुनीर शांतिवातां कर रहा हो वहां भारत की विश्वगुरु की भूमिका कहां रह जाती है? जोशी सही कह रहे हैं। हम पहले विश्वगुरु थे। अभी नहीं हैं। इसलिए अपने मुंह मियां मिड्डू नहीं बनना चाहिए।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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