योगिनी एकादशी 2026: श्रीहरि को चढ़ा दें ये दिव्य भोग, खुल सकते हैं सुख-समृद्धि और सौभाग्य के बंद द्वार
Yogini Ekadashi 2026 Bhog: योगिनी एकादशी 2026 के अवसर पर भगवान श्रीहरि विष्णु को प्रिय भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। जानिए इस दिन कौन-से दिव्य भोग चढ़ाने की पारंपरिक मान्यता है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान श्रीहरि विष्णु
Yogini Ekadashi 2026 Bhog For Lord Vishnu: 10 जुलाई 2026 को पवित्र योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। सनातन धर्म में इस एकादशी को भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली सबसे पुण्यदायी तिथियों में से एक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने तथा उन्हें प्रिय भोग अर्पित करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, नकारात्मकता समाप्त होती है और सुख, समृद्धि व आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सबसे पहले जान लें योगिनी एकादशी की सही तिथि और शुभ समय
वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 8:16 बजे प्रारंभ होगी और 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 5:22 बजे समाप्त होगी। वहीं हरि वासर का समापन 11 जुलाई को सुबह 10:32 बजे होगा। इसी कारण उदया तिथि और वैष्णव परंपरा के अनुसार कुछ श्रद्धालु 10 जुलाई को, जबकि कुछ 11 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत और पूजा करेंगे।
इन दिव्य भोगों से जल्दी प्रसन्न होते हैं भगवान श्रीहरि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को सात्विक, शुद्ध और प्रेम से अर्पित किया गया भोग अत्यंत प्रिय होता है। योगिनी एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि को पंचामृत, तुलसी दल, मखाने की खीर, दूध, दही, घी, शहद, मिश्री और ताजे मौसमी फल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
इसके अलावा नारियल और सूखे मेवे भी भोग में शामिल किए जा सकते हैं। ध्यान रखें कि भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है, इसलिए भोग में तुलसी अवश्य अर्पित करें।
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इस विधि से करें श्रीहरि की पूजा, बढ़ेगा शुभ फल
- योगिनी एकादशी की सुबह स्नान करके स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- इसके बाद भगवान को पीले पुष्प, चंदन, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें।
- घी का दीपक और धूप जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
- यदि संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ भी करें।
- अंत में भगवान की आरती करके भोग अर्पित करें और प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों में वितरित करें।
व्रत के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां
योगिनी एकादशी का व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता का भी प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन क्रोध, झूठ, विवाद, कटु वचन और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए।
जरूरतमंद लोगों की सहायता करना, दान-पुण्य करना, भगवान विष्णु का स्मरण करना और सात्विक जीवनशैली अपनाना शुभ माना गया है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार निर्जल, जल या फलाहार व्रत रख सकते हैं।
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योगिनी एकादशी का व्रत क्यों माना जाता है इतना प्रभावशाली?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होने की मान्यता है। इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है, परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और शुभ कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है। यह व्रत सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक माना जाता है।
पुराणों में क्यों बताया गया है इस एकादशी को दुर्लभ?
पुराणों में योगिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी व्रत बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक आराधना करने से पापों का क्षय होता है और भक्त पर श्रीहरि की विशेष कृपा बनी रहती है। यही कारण है कि यह व्रत सुख-समृद्धि, पारिवारिक शांति, आर्थिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना जाता है।
उपरोक्त लाभ धार्मिक मान्यताओं और पुराणों में वर्णित आस्थाओं पर आधारित हैं। इन्हें धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
