आज ललिता सप्तमी,देवी ललिता की विधिवत पूजा से मिलेगा संतानप्राप्ति का आशीष, जानें शुभ मुहूर्त
ललिता सप्तमी का व्रत हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के 14 दिन बाद और श्री राधाअष्टमी के एक दिन पहले पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के साथ ललिता जी की पूजा करने पर व्यक्ति को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है और उसका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहता है।
- Written By: सीमा कुमारी
ललिता सप्तमी 2024 (सौ.सोशल मीडिया)
‘राधा रानी’ (Radha Rani) की प्रिय सखी ‘देवी ललिता’ (Devi Lalita ) के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में हर साल भादो महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ‘ललिता सप्तमी’ (Lalita Saptami 2024) मनाई जाती है। इस साल यह तिथि 10 सितंबर 2024, मंगलवार को मनाई जाएगी। हिन्दू धर्म में न केवल देवी-देवता बल्कि उनके मित्रों, सहयोगियों और अनुयायियों को भी बहुत महत्व दिया गया है।
सुदामा जयंती, चैतन्य जयंती, ललिता जयंती आदि इस परंपरा के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। हिन्दू पर्व ललिता सप्तमी देवी ललिता देवी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो राधा रानी और भगवान कृष्ण की सखी हैं। ऐसे में आइए जानते हैं, ललिता सप्तमी कब है, इसका महत्व क्या है, पूजा विधि क्या है और उनकी पूजा करने के क्या लाभ हैं।
तिथि एवं शुभ मुहूर्त
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देवी ललिता की जयंती ललिता सप्तमी हर साल राधाष्टमी से पहले भादो मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2024 में भादो शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 9 सितंबर को रात 9 बजकर 53 मिनट पर शुरू होगी और 10 सितंबर को रात 11 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए सूर्य के उदयातिथि नियम के अनुसार ललिता सप्तमी पर्व 10 सितंबर 2024, मंगलवार को मनाई जाएगी।
पूजा विधि
सूर्योदय से पहले उठकर सुबह में स्नान के बाद गणेश जी, राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करना चाहिए।
फिर दिन में देवी ललिता देवी, देवी राधा और भगवान कृष्ण या शालिग्राम की पूजा करनी चाहिए।
सबसे पहले घी का दीया जलाएं। फिर उन्हें नारियल, चावल, हल्दी, चंदन, गुलाल, फूल और दूध अर्पित करें।
इसके बाद नैवेद्य और मिठाई चढ़ाएं। मालपुआ का भोग लगाने से विशेष लाभ होता है।
इसके बाद का जल का अर्घ्य दें और दाहिने हाथ में लाल धागा या मौली बांधें।
ललिता सप्तमी का उपवास सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक होता है। दिन में एक बार ही भोजन किया जाता है। अगले दिन सुबह प्रार्थना करने के बाद उपवास तोड़ा जाता है। इनको चढ़ाया गया फल प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
ललिता सप्तमी का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में ललिता सप्तमी का बड़ा महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की आठ सखियां थी, जिनके नाम श्री राधा, श्री ललिता, श्री विशाखा, श्री चित्रा, श्री इंदुलेखा, श्री चंपकलता, श्री रंग देवी, श्री सुदेवी और श्री तुंगविद्या था। कान्हा अपनी इन सभी सखियों में श्री राधा जी और ललिता जी से अत्यधिक प्रेम करते थे।
भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी का व्रत भी कान्हा की प्रिय सखी ललिता जी को समर्पित है। हिंदू मान्यता के अनुसार, इस पावन पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के साथ ललिता जी की पूजा करने पर व्यक्ति को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है और उसका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहता है। मान्यता यह भी है कि ललिता सप्तमी पर विधि-विधान से पूजा करने पर व्यक्ति को संतान सुख की प्राप्ति होती है।
