भगवान सूर्य,(सौ.सोशल मीडिया)
Makar Sankranti 2025: सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक मकर संक्रांति भी है। जो हर साल 14 जनवरी को पूरे देशभर में मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मकर संक्रांति को सूर्यदेव की उपासना और शनि दोष से मुक्ति के लिए सबसे शुभ दिन माना गया है। इस दिन विधिवत पूजा करने से भगवान सूर्य देव का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के घर आते हैं। ज्योतिष के अनुसार, साल में 12 संक्रांतियां होती हैं, क्योंकि सूर्य हर महीने राशि बदलते हैं।
जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस समय देवताओं की रात्रि समाप्त होती है, और दिन का आरंभ होता है, जिसे उत्तरायण और दक्षिणायन कहा जाता है। इस पर्व पर पवित्र नदी में स्नान और सूर्यदेव की पूजा का बड़ा महत्व है। आइए जानते है इस बारे में-
मकर संक्रांति पर इस विधि से करें सूर्य उपासना
धार्मिक मान्याताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा का बड़ा महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने के बाद तांबे के बर्तन में जल, सिंदूर, लाल फूल और काले तिल डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
अंजुली में जल लेकर ‘ ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव का ध्यान करना चाहिए। वेद-पुराणों और योग शास्त्रों में सूर्यदेव की उपासना को स्वास्थ्य और सुख का कारक बताया गया है। नियमित पूजा से रोग दूर होते हैं और शरीर की कमजोरी या जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।
मकर संक्रांति पर दान पुण्य और स्नान का महत्व
मकर संक्रांति के दिन स्नान दान पुण्य का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और दान पुण्य करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है। साथ ही व्यक्ति का भाग्योदय होता है। साथ ही इस दिन सूर्य देव उत्तरायण की तरफ से मकर रेखा से उत्तर दिशा में आ जाते हैं।
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जिस वजह से मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहा जाता है। साथ ही इस दिन सूर्यदेव के साथ साथ भगवान विष्णु की उपासना भी की जाती है। इस दिन दान पुण्य करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाएंगे। साथ ही इस दिन शनि गरीब, मजदूर और जरुरमंद लोगों को गुड़ रेवड़ी मूंगफली का दान आदि करना चाहिए।