मार्गशीर्ष अमावस्या पर तुलसी पूजा का क्यों है महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
Agahan Month Tulsi Puja 2025: धार्मिक दृष्टि से मार्गशीर्ष महीने की अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या का पर्व 20 नवंबर 2025 को मनाया जा रहा है। इसे अन्य अमावस्याओं की तुलना में अधिक पवित्र माना जाता है, क्योंकि यह महीना भगवान श्री कृष्ण को अति प्रिय है। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है ‘महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं’।
जहां एक ओर मार्गशीर्ष माह के दौरान भगवान श्री कृष्ण की पूजा का दोगुना फल प्राप्त होता है, ठीक ऐसे ही मार्गशीर्ष माह की अमावस्या पर पितृ तर्पण और दान का विशेष महत्व होने के साथ-साथ तुलसी पूजा का भी फलदायी समय होता है।
शास्त्रों में बताया गया है कि तुलसी पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और समृद्धि का वातावरण बनता है। ऐसे में आइए जानते है मार्गशीर्ष अमावस्या पर तुलसी पूजा का क्यों है महत्व,और कौन सा जलाना चाहिए दीपक?
ज्योतिषयों के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या पर तुलसी पूजा करने के लिए सुबह-सुबह स्नान कर घर की सफाई करना अत्यंत आवश्यक है। तुलसी के पौधे के चारों ओर हल्का सा पानी छिड़कें और उन्हें साफ वस्त्र से पोछें।
तुलसी के चरणों में लाल या पीले रंग का चंदन, सिंदूर और अक्षत चढ़ाएं। पूजा के दौरान तुलसी माता के सामने दीपक जलाना अत्यंत फलदायी माना गया है।
दीपक में घी या तेल डालें। यदि तेल का दीपक जलाएं तो सरसों या तिल का तेल श्रेष्ठ माना गया है। दीपक को तुलसी के पौधे के पास रखें और उसकी चारों दिशाओं में प्रकाश फैलने दें।
इस समय ॐ तुलसीदेव्यै नमः या कोई अन्य तुलसी स्तोत्र का जप करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
सनातन धर्म में तुलसी पूजा के साथ दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। गेहूं, चावल, गुड़, तिल या कपड़े का दान तुलसी माता को अर्पित किया जा सकता है।
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हिन्दू शास्त्रों में बताया गया है कि मार्गशीर्ष अमावस्या पर तुलसी पूजा और दीपक जलाने की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक वृद्धि का माध्यम भी है। इस दिन श्रद्धा और विश्वास से की गई पूजा जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाती है।