नागपंचमी के दिन अनोखी परंपरा (सौ.सोशल मीडिया)
देशभर में नागपंचमी का त्योहार आने वाले 9 अगस्त 2024 को मनाया जाएगा इस दिन नाग देवता की पूजा महत्व होता है। जैसा कि, हम जानते हैं भगवान शिव के गले का श्रृंगार नाग देवता माने जाते हैं जो उनकी सेवा में हमेशा समर्पित होते है। नागपंचमी के दिन विधि-विधान के साथ पूजा का महत्व होता हैं तो वहीं पर कई मान्यताएं इस दिन के लिए प्रचलित हैं अनोखी परंपराओं के अनुसार, इस दिन तवा चढ़ाना या घर के चूल्हे पर रोटियां सेकना वर्जित माना जाता है। चलिए जानते हैं ज्योतिषाचार्य से इस अनोखी परंपरा के पीछे की वजह के बारे में।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागपंचमी के दिन घर के चूल्हे पर तवा चढ़ाया नहीं जाता हैं इस दिन रोटी भी नहीं बनाई जाती है। कहते हैं कि, रोटी बनाने के लिए जिस लोहे के जिस तवे का इस्तेमाल किया जाता है उसे नाग का फन माना जाता है। तवे को नाग के फन का प्रतिरूप माना गया है. इसलिए नागपंचमी के दिन आग पर तवा नहीं रखा जाता है। इस दिन रोटी के अलावा चावल भी बनाना वर्जित ही माना जाता हैं कहते हैं चावल का संबंध नाग देवता के दांतों से होता है।
नागपंचमी के दिन कई कार्यों की मनाही होती हैं। कहते हैं ब्रम्हाजी ने सर्पों को नाग पंचमी के दिन पूजे जाने का वरदान दिया था। कहते हैं नाग देवता की पूजा करने से राहु-केतु जनित दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इस दिन कई कार्य वर्जित मानें जाते हैं। जिसमें किसी भी काम के लिए जमीन की खुदाई न करें. इस दिन सिलाई, कढ़ाई नहीं करनी चहिए, क्योंकि नाग पंचमी पर नुकीली और धारदार चीजों जैसे चाकू, सूई का इस्तेमाल अशुभ माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के हिसाब से भी मां लक्ष्मी के त्योहारों में विशेष पकवान बनाने की परंपरा है. यही वजह है कि आज भी अधिकांश घरों में इन त्योहारों पर रोटी की जगह पूड़ी बनाई जाती है। इसके अलावा त्योहारों में से एक शरद पूर्णिमा के दिन घर में कच्ची रसोई नहीं बनानी चाहिए. इस दिन भी खीर-पूरी बनाने का नियम है. इसी तरह से शीतला अष्टमी पर शीतला मैया की पूजा होती है. माता को बासी भोजन से भोग लगाए जाता है. इस दिन घर में ताजी रोटियां बनाना वर्जित है।