Hanuman Jayanti: जब सूर्य को फल समझ बैठे थे हनुमान तो मचा था पूरे ब्रह्मांड में हाहाकार, साल में 2 बार क्यों मनाते है हनुमान जयंती
आपको पता है हनुमान जयंती को साल में 2 बार मनाया जाता है आखिर इसके पीछे क्या कारण है जानते है इस लेख में। बता दें कि, हनुमान जयंती या हनुमान जन्मोत्सव इस बार शुभ दिन 12 अप्रैल दिन शनिवार को पड़ रहा है।
- Written By: दीपिका पाल
हनुमान जयंती साल में दो बार क्यों मनाते है (सौ.सोशल मीडिया)
Hanuman Jayanti 2025: रामनवमी के बाद अब भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की जयंती 12 अप्रैल को मनाई जाएगी। हनुमान जी की जयंती से जुड़े वैसे तो कई तथ्य है लेकिन आपको पता है हनुमान जयंती को साल में 2 बार मनाया जाता है आखिर इसके पीछे क्या कारण है जानते है इस लेख में। बता दें कि, हनुमान जयंती या हनुमान जन्मोत्सव इस बार शुभ दिन 12 अप्रैल दिन शनिवार को पड़ रहा है।
जानिए दो बार क्यों मनाते है हनुमान जयंती
यहां पर शास्त्रों के अनुसार, भगवान हनुमान जी का जन्मोत्सव साल में दो बार पड़ता है। जैसे चैत्र माह की पूर्णिमा के साथ-साथ कार्तिक महीने की पूर्णिमा को भी मनाया जाता है। इसके अलावा राज्यों में हनुमान जयंती को मनाने के भी अलग तारीख है यहां पर केरल और तमिलनाडु में मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को और उड़ीसा में वैशाख माह के पहले दिन हनुमान जयंती मनाने की परंपरा है। दूसरी जानकारी में हनुमान जी की एक जयंती उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है और दूसरी जयंती उनके विजय अभिनन्दन महोत्सव के रूप में मनाई जाती है।
हनुमान जन्मोत्सव से जुड़ी पौराणिक कथा
यहां पर हनुमान जन्मोत्सव से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसे हर कोई शायद जानते है। कहा जाता है कि, जन्म से ही हनुमान जी के पास अद्भुत शक्तियां थी। एक बार उन्होंने सूर्य को फल समझा और उसको खाने की कोशिश की, तब हनुमान जी को ऐसा करने से रोकने के लिए देवराज इंद्र ने उन पर प्रहार किया और उन्हें मूर्छित कर दिया। हनुमान जी पवनदेव के पुत्र हैं, इस घटना पवनदेव क्रोधित हो गए और उन्होंने वायु का प्रवाह रोक दिया। इससे पूरे ब्रह्मांड में संकट आ गया, सभी देवी देवताओं ने ब्रह्मा जी से प्रार्थना की कि वे पवनपुत्र हनुमान को ठीक कर दें वरना हाहाकार मच जाएगा। तब ब्रह्मा जी ने पवन पुत्र को जीवनदान दिया. चूंकि चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी को दूसरा जीवन मिला था इसलिए इस तिथि पर भी हनुमान जयंती मनाई जाती है।
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जयंती नहीं जन्मोत्सव कहना सहीं
यहां पर हनुमान जी की जयंती को जन्मोत्सव कहना सही होता है। हनुमान जी ऐसे देवता हैं जिनके लिए माना जाता है कि वे अभी-अभी धरती पर वास कर रहे हैं और उन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है। वहीं पर जयंती शब्द का इस्तेमाल तब ही करते है जब किसी व्यक्ति या महापुरूष का जन्म हुआ और मृत्यु भी।
