रमजान(सौ.सोशल मीडिया)
Why Muslims Give Fitra Before Eid: 19 फरवरी 2026 से शुरू मुस्लिम समुदाय का पाक महीना रमजान अब अपने अंतिम चरण में है। यह पाक महीना हर मुसलमान के लिए खास महत्व रखता है। इस महीने इस्लाम धर्म के लोग रोजा रखते है। ज्यादा से ज्यादा समय अल्लाह की इबादत करते है।
इस्लाम धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मुस्लिमों का पवित्र ग्रंथ कुरान भी इसी महीने अवतरित हुआ था। इसलिए इसे रहमत और हिदायत का महीना भी कहा जाता है। रमजान के महीने में हर मुसलमान के लिए रोजा रखना अनिवार्य माना गया है।
फितरा यानी सदका-ए-फितर रमजान के पवित्र महीने के अंत में और ईद-उल-फितर की नमाज से पहले हर सक्षम मुसलमान पर अनिवार्य (वाजिब) दान है। इसका उद्देश्य रमजान के रोजों में हुई कमियों को पूरा करना और गरीबों को ईद की खुशियों में शामिल करना है। यह घर के प्रत्येक सदस्य बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक की ओर से लगभग पौने दो किलो गेहूँ, जौ, या उसके बराबर कीमत के रूप में दिया जाता है।
मौलानाओं के अनुसार, फितरा इसलिए अनिवार्य है ताकि ईद के दिन समाज का कोई भी व्यक्ति, विशेषकर गरीब, भूखा न रहे और सभी लोग खुशी से त्यौहार मना सकें।
रमजान के पूरे महीने रोज़ों के दौरान हुई अनजाने में गलतियों या कमियों की माफी (पाक होने) के लिए फितरा दिया जाता है।
इसे ईद की नमाज से पहले अदा करना जरूरी है, ताकि जरूरतमंद लोग उस पैसे से ईद की खरीदारी कर सकें।
जकात संपत्ति पर दी जाती है (जो निसब पर हो), जबकि फितरा प्रति व्यक्ति पर अनिवार्य है, चाहे वह बच्चा हो या बड़ा।
हर मुसलमान जिसके पास अपनी जरूरत से ज्यादा खाना या संपत्ति हो, उस पर फितरा वाजिब है।
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मुस्लिम धर्म गुरु के अनुसार, फितरा आमतौर पर गेहूं, जौ, खजूर या किशमिश के रूप में दिया जा सकता है। गेहूं के हिसाब से इसकी मात्रा लगभग पौने दो किलो (1.75 kg) प्रति व्यक्ति होती है, या फिर इसकी नकद कीमत दी जाती है जो हर साल की बाजार दर पर तय की जाती है।