नागपंचमी की अनोखी परंपरा (सौ.सोशल मीडिया)
सावन के महीने के बाद अब भादो मास की शुरूआत हो गई हैं जिसमें कई बड़े व्रत और त्योहार आ रहे हैं ऐसे में 9 अगस्त को देशभर में नागपंचमी का त्योहार भी मनाया जाएगा। इस दिन नागदेवता की पूजा का महत्व होता हैं हिन्दू धर्म में नाग देवता को जल और अन्न का देवता माना जाता है। सावन में आने वाली शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी की विधि विधान से पूजा भी की जाती है। लेकिन परंपरा के अनुसार, घर के दरवाजे पर नाग देवता की गोबर से आकृति बनाने की परंपरा होती है। आखिर इसका क्या महत्व होता हैं चलिए जानते हैं इसके बारे में..
नागपंचमी के दिन की इस अनोखी परंपरा को लेकर भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा ने जानकारी दी है। हिंदू धर्म में घर के दरवाजे पर नाग देवता की गोबर से आकृति बनाने की परंपरा होती है। जिसके अनुसार नाग पंचमी के दिन घर के मुख्य द्वार पर नाग देवता की आकृति बनाई जाती है. इसके लिए गाय के गोबर का उपयोग किया जाता है. मान्यता है कि, ऐसा करने से घर में शुभता आती है और घर में कभी नाग भय नहीं रहता।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नागपंचमी पर पूजे जाने वाले नाग देवता को भगवान शिव के गले का श्रृंगार माना जाता हैं इस दिन नाग देवता के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा भी की जाती है, माना जाता है कि नागपंचमी के दिन नाग देवता के साथ शिवशक्ति की पूजा करने से घर में समृद्धि आती है और नाग देवता के साथ भगवान शिव की कृपा भी बनी रहती है।
आपको बताते चलें कि, इस वर्ष नाग पंचमी 09 अगस्त को मनाई जा रही है. पूजा के लिए शुभ समय शाम 05 बजकर 47 मिनट से लेकर 08 बजकर 27 मिनट तक है। इस शुभ मुहुर्त में पूजा करने का महत्व होता है जिसमें नियमों का पालन करना चाहिए। नागपंचमी में पूजा करने के अलावा कई अनोखी पंरपराएं होती है जिसका पालन करना चाहिए, और जानना भी जरूरी है।