स्वास्तिक बनाते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान (सौ.सोशल मीडिया)
Swastik On Main Door: हिन्दू धर्म में कुछ चिन्हों को बहुत शुभ माना जाता है। इन्हें में से एक है स्वास्तिक का चिन्ह। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। धर्म शास्त्रों में स्वास्तिक का विशेष महत्व बताया गया है और वास्तु शास्त्र के अनुसार इसे घर के मुख्य द्वार पर बनाना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
हालांकि स्वास्तिक बनाने से जुड़े कई नियम भी हैं जिनका पालन करना बेहद जरुरी है। अगर इन नियमों का पालन न किया जाए तो इससे उल्टा प्रभाव भी नजर आ सकता है। स्वास्तिक कई तरह की वस्तुओं से बनाया जाता है और हर एक वस्तु से बनाने पर अलग-अलग लाभ मिलते हैं।आइए जानते है इस बारे में-
स्वास्तिक बनाने के लिए लाल सिंदूर का ही करें उपयोग
स्वास्तिक का सनातन धर्म में अत्यधिक महत्व है। इसे बनाते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाते समय विशेष रूप से इसकी सामग्री पर ध्यान देना चाहिए। केवल लाल सिंदूर का ही प्रयोग करें क्योंकि यह शुभता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
स्वास्तिक बनाते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान :
साफ-सफाई रखें
मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने के बाद उस स्थान को हमेशा स्वच्छ रखें। गंदगी जमा न होने दें, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकती है।
जूते-चप्पल न रखें
जहां स्वास्तिक बनाया गया हो, वहां जूते-चप्पल न रखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है।
घर के आंगन में भी बनाएं स्वास्तिक- मुख्य द्वार के अलावा, घर के आंगन के बीच में भी स्वास्तिक बनाया जा सकता है, जिससे पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सिर्फ लाल रंग का उपयोग करें-
स्वास्तिक बनाते समय केवल लाल सिंदूर या हल्दी-कुमकुम का ही उपयोग करें, अन्य रंगों का प्रयोग न करें।
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स्वास्तिक चिन्ह का महत्व
आपको बता दें, स्वास्तिक न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में भी सहायक होता है। इसे सही विधि से बनाकर घर के वातावरण को सुखद और मंगलमय बनाया जा सकता है।इसलिए सनातन धर्म में इस चिन्ह का बड़ा महत्व है।