
वट सावित्री व्रत के नियम (सौ. सोशल मीडिया)
हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का महत्व होता है इसमें सुहागिन महिलाओं द्वारा 26 मई को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। वट सावित्री के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती है। इस व्रत से सावित्री और सत्यवान की कथा जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि, वट सावित्री व्रत रखने से पति के ऊपर मंडरा रही हर संकट टल जाती है और दांपत्य जीवन भी सुखमय, खुशहाल बना रहता है।
हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन सावित्री व्रत किया जाता है। इस व्रत के कई नियम होते है तो वहीं पर कई राज्यों में इस व्रत को लेकर परंपराएं निभाई जाती है। क्या आपने वट सावित्री व्रत पर धागा बांधने के नियम के बारे में जाना है, अगर नहीं तो चलिए जानते हैं…
आपको बताते चलें कि, वट सावित्री व्रत के दिन कई नियमों में बरगद के पेड़ को कच्चा धागा बांधने की परंपरा खास होती है। वट सावित्री व्रत के दिन बरगद पेड़ की विधिपूर्वत पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। यहां पर नियम कहता है कि, वट सावित्री के दिन बरगद के पेड़ की पूजा करने के साथ उसकी सात बार परिक्रमा करती हैं। इसके अलावा व्रती महिलाएं बरगद के पेड़ में सात बार कच्चा सूत भी लपेटती हैं। इसके पीछे माना जाता है कि, वट वृक्ष में सात बार कच्चा सूत लपेटने से पति-पत्नी का संबंध सात जन्मों तक बना रहता है। यह भी कहा जाता है कि, वट सावित्री के दिन बरगद के पेड़ पर कलावा बांधने से अकाल मौत का खतरा भी टल जाता है।
आपको बताते चलें कि, वट सावित्री की कथा पहले के समय से ही प्रचलित है। कथा के अनुसार, यमराज ने माता सावित्री के पति सत्यवान के प्राणों को वट वृक्ष के नीचे ही लौटाया था और उन्हें 100 पुत्रों का वरदान दिया था। कहा जाता है कि उसके बाद से ही वट सावित्री व्रत और वट वृक्ष की पूजा की परंपरा शुरू हुई। वट सावित्री व्रत से जुड़ी यह मान्यता भी कहती है कि, बरगद पेड़ की पूजा करने से यमराज देवता के साथ त्रिदेवों की भी कृपा प्राप्त होती है।






