क्यों बनाई जाती है बैसाखी? 2026 में 'इस' दिन मनाई जाएगी Baisakhi, नोट कीजिए सटीक तिथि

Baisakhi Tithi 2026: बैसाखी सिख समुदाय का एक प्रमुख त्यौहार है जो हर साल पंजाब और भारत के अन्य हिस्सों में मनाया जाता है। यह त्यौहार फसल कटाई के अवसर पर खुशियों और आभार के रूप में मनाया जाता है।
Baisakhi Harvest Festival
बैसाखी का पर्व (सौ.AI)
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Baisakhi Harvest Festival:सिख समुदाय के लिए बैसाखी का पर्व बड़ा महत्व रखता है। यह पर्व पंजाब, हरियाणा समेत उत्तरी भारत में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 14 अप्रैल को बैसाखी मनाई जाएगी।

बैसाखी का पर्व सिख नव वर्ष की शुरुआत

बताया जाता है कि इसी दिन से सिख नव वर्ष की शुरुआत होती है। बता दें कि अलग-अलग राज्यों में बैसाखी को अन्य नामों से भी जाना जाता है। असम में इसे 'बिहू', बंगाल में 'पोइला बैसाख' जैसे नामों से जाना जाता है। इसी तरह इस दिन बिहार में सत्तूआन का पर्व मनाया जाता है। बैसाखी को 'बसोआ' भी कहते हैं। तो आइए जानते हैं बैसाखी से जुड़ी अन्य जरूरी बातों के बारे में।

  • बैसाखी 2026 शुभ मुहूर्त

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे मेष संक्रांति कहा जाता है। इसी मेष संक्रांति के दिन बैसाखी का पर्व मनाया जाता है। इस साल 14 अप्रैल को सूर्य देव सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में इस साल 14 अप्रैल को बैसाखी मनाई जाएगी।

  • सिख धर्म में बैसाखी का महत्व

सिख इतिहास में बैसाखी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन 13 अप्रैल 1699 को सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस ऐतिहासिक घटना के कारण बैसाखी सिख समुदाय के लिए एक पवित्र और गौरवपूर्ण दिन बन गया। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर अरदास करते हैं और गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ सुनते हैं।

  • किसानों के लिए खुशी का पर्व

बैसाखी को किसानों का त्योहार भी कहा जाता है। इस समय रबी की फसल, विशेष रूप से गेहूं की फसल, पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है। किसान अच्छी फसल के लिए भगवान और प्रकृति का धन्यवाद करते हैं और इस खुशी को उत्सव के रूप में मनाते हैं। पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में लोग ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा नृत्य करते हैं और अपनी खुशी व्यक्त करते हैं।

कैसे मनाया जाता है बैसाखी

सिख धर्म गुरु के अनुसार, बैसाखी के दिन सुबह पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसके बाद श्रद्धालु नए कपड़े पहनकर गुरुद्वारों में जाते हैं और गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेकते हैं।

इस दिन गुरुद्वारों में कीर्तन और पाठ का आयोजन किया जाता है। साथ ही श्रद्धालुओं को कड़ा प्रसाद वितरित किया जाता है और लंगर लगाया जाता है, जहां हर धर्म और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। यही परंपरा इस पर्व को सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक भी बनाती है।

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