

दिवाली पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर में चरण चिह्न बनाए जाते हैं।
लक्ष्मी जी के पैरों के निशान शुभ आगमन का प्रतीक माने जाते हैं।
इन्हें आमतौर पर मुख्य दरवाजे से घर के अंदर की ओर बनाया जाता है।
चरण चिह्न बनाने के लिए रोली, कुमकुम, हल्दी और चावल के आटे का इस्तेमाल होता है।
दिवाली पर इन निशानों को सुख-समृद्धि और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है।
Lakshmi Charan Puja Vidhi: दिवाली का त्योहार आते ही घरों की साफ- सफाई और सजावट शुरू हो जाती है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने और दीपक जलाने के साथ मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाने की भी परंपरा है। आपने भी कई घरों में दरवाजे से लेकर पूजा स्थल तक छोटे-छोटे पैरों के निशान बने देखे होंगे।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाने के पीछे क्या मान्यता है और इन्हें घर में किस दिशा में बनाया जाता है? आइए जानते हैं इस परंपरा का धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी जरूरी बातें।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और भक्तों के घर पधारती हैं। इसी विश्वास के साथ लोग अपने घरों को साफ-सुथरा रखते हैं और मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाते हैं। इन्हें देवी के घर में आगमन और स्वागत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है।
मां लक्ष्मी के चरण चिह्न शुभता, धन-धान्य और खुशहाली से जुड़े माने जाते हैं। धार्मिक परंपरा में इन्हें देवी के आगमन का प्रतीक माना गया है। कई परिवारों में यह विश्वास है कि घर के प्रवेश द्वार से अंदर की ओर बनाए गए पैरों के निशान मां लक्ष्मी के घर में आने का संकेत देते हैं। यही कारण है कि दीपावली की सजावट में इन्हें विशेष स्थान दिया जाता है।
परंपरागत रूप से मां लक्ष्मी के चरण चिह्न मुख्य द्वार पर बनाए जाते हैं। कई परिवारों में इन्हें दरवाजे से पूजा स्थल की ओर अंदर की दिशा में बनाया जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार चरण चिह्न बना सकते हैं।
दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाने के लिए रोली, कुमकुम, हल्दी, चावल के आटे और रंगोली के रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। कई लोग लाल रंग से पैरों के निशान बनाना पसंद करते हैं। आप चाहें तो बाजार में मिलने वाले लक्ष्मी चरण स्टिकर या रंगोली के डिजाइन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
लक्ष्मी पूजा के दौरान चरण चिह्न बनाना श्रद्धा और स्वागत की भावना से जुड़ी परंपरा है। इसे घर में सकारात्मकता और मंगलकामना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस दिवाली आप भी घर के मुख्य द्वार को दीपों और रंगोली से सजाकर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बना सकते हैं। इससे त्योहार की पारंपरिक सजावट और भी सुंदर बन सकती है।