देवी शाकंभरी व मां दुर्गा,(सौ.सोशल मीडिया)
Shakambhari Navratri 2025: देवी शाकंभरी को समर्पित शाकंभरी नवरात्रि का पर्व हर साल पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक मनाया जाता है। इस साल 2025 शाकम्भरी नवरात्रि का पर्व आज, 7 जनवरी 2025 से शुरु हो रहा है, और अगले सोमवार 13 जनवरी 2025 तक रहेगा।
शाकम्भरी नवरात्रि का उत्सव आठ दिनों तक मनाया जाता है। ये नवरात्रि मुख्य रूप से राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश की कई जगहों पर बहुत ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
इस दौरान माता दुर्गा के शाकंभरी अवतार की पूजा की जाती है। माता का ये अवतार पोषण और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान लोग उपवास रखते हैं और देवी दुर्गा की विशेष पूजा करते हैं। आइए जानते है इस साल 2025 शाकम्भरी नवरात्रि कब मनाई जाएगी।
कब से शुरु शाकम्भरी नवरात्रि 2025
पंचांग के अनुसार, शाकम्भरी नवरात्रि पर्व 7 जनवरी 2025 से प्रारंभ होकर 13 जनवरी 2025 तक रहेगा। अष्टमी तिथि का प्रारम्भ 6 जनवरी 2025 को शाम 06:23 बजे से होगा और इसकी समाप्ति 7 जनवरी 2025 को शाम 04:26 बजे होगी।
ऐसे करें माता शाकम्भरी पूजा
शाकंभरी नवरात्रि के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा सामग्री एकत्र कर लें। ध्यान रहे कि पूजा सामग्री में मिश्री, मेवा, पूरी, हलवा और शाक सब्जियां जरूर हों। इसके बाद माता की प्रतिमा को एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर रखें।
इसके बाद माता की प्रतिमा पर गंगाजल छिड़ककर पूजा शुरू करें। दुर्गा स्तोत्र का पाठ करें। माता को मिठाई का भोग लगाएं। उन्हें फल और फूल चढ़ाएं। इस दौरान मां दुर्गा के मंत्र का 108 बार जाप जरूर करें जो इस उत्सव से जुड़ा एक प्रमुख रिवाज माना जाता है। इसके बाद शाकंभरी माता की आरती करें। इस तरह से इस नवरात्रि के हर दिन माता की पूजा करें।
शास्त्रों के अनुसार, जो भी श्रद्धालु निश्छल मन से ‘मां शाकम्भरी’ की स्तुति, ध्यान, जप, पूजा-अर्चना करता है, वह शीघ्र ही अन्न, पान एवं अमृतरूप अक्षय फल को प्राप्त करता है। भक्ति-भाव से माँ की उपासना करने वाले के सभी मनोकामनाएं पूरी होते हैं।
देवी शाकंभरी की महिमा
सनातन धर्म में देवी शाकंभरी का बड़ा महत्व है। देवी शाकंभरी को अन्नपूर्णा का भी रूप माना जाता है, जो भुखमरी और अकाल से मुक्ति दिलाती हैं। उनकी पूजा से न केवल जीवन में सुख-समृद्धि आती है, बल्कि आध्यात्मिक शांति और संतुलन भी प्राप्त होता हैं।
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आपको बता दें, यह पर्व किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि यह फसलों की समृद्धि और बेहतर उत्पादन का प्रतीक है। देवी शाकंभरी की कृपा से कृषि भूमि उपजाऊ होती है और पर्यावरण में संतुलन बना रहता है। नवरात्रि के दौरान व्रत रखने और मंत्रों का जाप करने से आत्मा की शुद्धि होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इसलिए हिंदू धर्म में देवी शाकंभरी का बड़ा महत्व है।