‘माघ पूर्णिमा’को गंगा स्नान कर महादेव शिव और श्रीहरि विष्णु की पूजा का महात्म्य जानिए, यहां देखें पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त
माघ महीने की पूर्णिमा 12 फरवरी 2025, बुधवार के दिन पड़ रही है। पूर्णिमा तिथि को बलिष्ठ और सौम्य तिथि भी कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा अपने पूरे प्रभाव में रहता है, इसलिए इस दिन को फूल मून भी कहा जाता है।
- Written By: सीमा कुमारी
माघ पूर्णिमा,(सौ.सोशल मीडिया)
Magha Purnima 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का बड़ा महत्व है। यह पावन तिथि हर महीने शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन पड़ती है। इस बार माघ महीने की पूर्णिमा 12 फरवरी 2025, बुधवार के दिन पड़ रही है। पूर्णिमा तिथि को बलिष्ठ और सौम्य तिथि भी कहा जाता है, इस दिन चंद्रमा अपने पूरे प्रभाव में रहता है, इसलिए इस दिन को फूल मून भी कहा जाता है।
धार्मिक मत है कि माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान कर भगवान विष्णु एवं शिव की पूजा करने से साधक द्वारा जन्म-जन्मांतर में किए गए पाप धुल जाते हैं। साथ ही अश्वमेघ यज्ञ समतुल्य फल प्राप्त होता है। माघ पूर्णिमा पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। आइए जानते हैं कि माघ पूर्णिमा कब है और स्नान-दान के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
क्या है माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
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पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा की शुरुआत 11 फरवरी को शाम 06 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 12 फरवरी को शाम 07 बजकर 22 मिनट पर पूर्णिमा तिथि का समापन होगा। सनातन धर्म में सूर्योदय के बाद से तिथि की गणना की जाती है। इसके लिए 12 फरवरी को माघ पूर्णिमा मनाई जाएगी। माघ पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय शाम 05 बजकर 59 मिनट पर होगा।
पूर्णिमा व्रत करें इन देवी-देवता की पूजा
पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन में शांति और समृद्धि आती है। यह दिन ध्यान और आध्यात्मिक साधना के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा हासिल करने का यह सबसे अच्छा समय है। गरीबों को भोजन, कपड़े और पैसे का दान करना पुण्य मिलता है। इस दिन अन्न और जल दान करने का विशेष महत्व है।
जानिए माघ पूर्णिमा महत्व
बता दें, माघ माह में प्रतिदिन भक्तगण प्रातःकाल गंगा और अन्य पवित्र नदि में स्नान करते हैं। यह नित्य स्नान पौष पूर्णिमा से आरम्भ होकर माघ पूर्णिमा पर समाप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ माह में किए गए दान-पुण्य आदि धार्मिक कर्म अति शीघ्र फलित होते हैं।
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अतः इस पावन काल में भक्तगण यथा शक्ति दान-पुण्य आदि कर्म करते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन कल्पवास का समापन भी होता है। माघ माह में अनेक भक्त एक माह तक प्रयाग स्थित गंगा तट पर निवास करते हैं, जिसे कल्पवास कहा जाता है।
