'अनंत चतुर्दशी' के दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर संध्याकालीन पूजा का शुभ मुहूर्त जानिए

Anant Chaturdashi: कल 6 सितंबर 2025 को अनंत चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब रहेगा।
'अनंत चतुर्दशी' के दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर संध्याकालीन पूजा का शुभ मुहूर्त जानिए
ये रहेगा अनंत चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त (सौ.सोशल मीडिया)
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Anant Chaturdashi Puja Vidhi Or Shubh Muhurt: अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। जो हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष, यह पावन तिथि 6 सितंबर को है। इसे ‘अनंत चौदस’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है।

इसके अलावा, इस दिन ही 10 दिनों के गणेश उत्सव का समापन भी होता है। ऐसे में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। आइए जान लेते हैं कि अनंत चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त कब रहेगा और किसी विधि से आपको पूजा करनी चाहिए।

ये रहेगा अनंत चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त की पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 04:51 AM से 05:38 AM तक

प्रात: कालीन संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 05:14 AM से 06:24 AM तक

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:12 PM से 01:01 PM तक

सायं कालीन संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 06:49 PM से 07:57 PM तक

ऐसे करें अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु पूजा

  • अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है।
  • इस दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद व्रत संकल्प लें और पूजा घर की सफाई करने के साथ गंगाजल का छिड़काव करें।
  • उसके बाद कलश स्थापित करें।
  • फिर कलश में बर्तन रखें।
  • इसमें कुश से निर्मित अनंत की स्थापना करें।
  • अगर अनंत बनाना मुश्किल है, तो भगवान विष्णु की तस्वीर भी रख सकते हैं।
  • इसके बाद अनंत सूत्र तैयार करने के लिए एक धागे में कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर इसमें 14 गांठ बांध लें।
  • उसके बाद भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने चढ़ा दें।

अनंत चतुर्दशी पर करें इन मंत्रों का जप

ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्मी नारायण नमः॥

अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव। अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः।।

जानिए क्या है अनंत चतुर्दशी की महिमा

अनंत चतुर्दशी भगवान नारायण के पूजन का पर्व है। इस दिन ही भगवान विष्णु ने 14 लोकों यानी तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी।

इस दिन ही गणेश जी को विसर्जित करते हैं। जिन लोगों के रोग ठीक नहीं हो रहे हैं। उन लोगों को ये व्रत जरूर रखना चाहिए। परिवार में कोई भी इस व्रत को रख सकता है। चाहे पति के लिए पत्नी, पत्नी के लिए पति, पिता के लिए पुत्र यह व्रत कर सकता है।