
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत(सौ.सोशल मीडिया)
हिन्दू धर्म में पूर्णिमा तिथि खास महत्व रखता है। ज्येष्ठ महीने में आने वाली पूर्णिमा को वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। इस बार वट पूर्णिमा का व्रत 10 जून को रखा जाएगा। साल में वट सावित्री का व्रत दो बार रखा जाता है।
आपको बता दें, जहां उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत रखा जाता है तो वहीं ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत महाराष्ट्र, गुजरात आदि में रखा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं वट पूर्णिमा कब है और इसका महत्व क्या है…
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जून को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर होगी। वहीं तिथि का समापन 11 जून को दोपहर 1 बजकर 13 मिनट पर होगा। ऐसे में ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि का व्रत 10 जून को करना उचित माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें-गंगा दशहरा को अर्पित करें शिवलिंग पर ये वस्तुएं, मनोकामनाएं होंगी पूरी!
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत एक हिंदू धार्मिक त्योहार है जो सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए मनाया जाता है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत में, महिलाएं बरगद के पेड़ (वट वृक्ष) की पूजा करती हैं और व्रत रखती है।






