Ekadashi : 7 सितंबर को अजा एकादशी, हजार अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की मान्यता, जानें पूजा और पारण का सही समय

Aja Ekadashi Par Vishnu Puja: जो भी व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से उपवास करता है, उसे एक हजार अश्वमेध यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है और व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।
Aja Ekadashi Kab Hai
अजा एकादशी का व्रत (सौ.AI)
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Aja Ekadashi Kab Hai : अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर, सोमवार के दिन रखा जाएगा। धर्म ग्रथों में अजा एकादशी का व्रत की महिमा का विस्तृत वर्णन किया गया है जो भी व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से उपवास करता है, उसे एक हजार अश्वमेध यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है और व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

जा एकादशी व्रत कब है 2026?

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अजा एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम 7:29 बजे से शुरू होकर 7 सितंबर की शाम 5:03 बजे तक रहेगी। वहीं, व्रत खोलने का सही समय 8 सितंबर की सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे के बीच रहेगा।

क्या है अजा एकादशी व्रत का पारण का समय?

अजा एकादशी व्रत का पारण का समय 8 सितंबर को सुबह 6 बजकर 82 मिनट से लेकर 8 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।

अजा एकादशी क्यों है ख़ास?

धर्म शास्त्रों में अजा एकादशी के व्रत को पाप कर्मों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है। कहा जाता है कि इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सुख और समृद्धि के संयोग बनते है। बताया जाता है कि, इस दिन पूजा- पाठ के अलावा, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। ऐसा करने से श्री हरी भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की कृपा बरसती है।

अजा एकादशी पर कैसे करें पूजा?

  • अजा एकादशी के दिन हर दिन की तरह सुबह उठकर स्नान करे।

  • इसके बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।

  • फिर सूर्यदेव को अर्घ्य देते हुए भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें।

  • फिर पूजा स्थल पर चौकी रखें और भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें।

  • इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।

  • फिर दीपक जलाकर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और विष्णु सहस्त्रनाम मंत्र का पाठ करें।

  • अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पालन करें।

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