Janmashtami 2026: रात 12 बजे व्रत खोलना सही या गलत? पंचांग से जानें पारण का सही समय

Janmashtami Paran Time 2026: अक्सर श्रद्धालुओं के मन में सवाल रहता है कि क्या रात 12 बजे कृष्ण जन्म के बाद व्रत खोल सकते है। यहां जानिए रात 12 बजे व्रत खोलना सही है या नहीं।
Janmashtami Vrat Paran Kab Hai
भगवान कृष्ण (सौ.AI)
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Janmashtami Vrat Paran Kab Hai: आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन कृष्ण भक्त पूरे दिन व्रत रखकर रात में निशीथ काल में भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं लेकिन सबसे ज्यादा भक्तों में कंफ्यूजन व्रत के पारण यानी व्रत खोलने के समय को लेकर रहता है।

अधिकतर व्रती रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म और पूजा करने के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोल लेते हैं, जबकि कई लोग दूसरे दिन पारण करते है। धर्मशास्त्र में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति के बाद पारण करना शुभ माना जाता है।

इस साल जन्माष्टमी का पारण समय क्या है?

पंचांग के अनुसार, इस साल जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात तक और रोहिणी नक्षत्र भी रात तक रहने वाली है इसलिए धर्मशास्त्रीय पद्धति में व्रत का पारण 5 सितंबर 2026 को सूर्योदय के बाद किया जाएगा।

इस समय अष्टमी और रोहिणी दोनों समाप्त हो जायेगे। धर्मशास्त्र में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति के बाद पारण करना शुभ माना जाता है।

पारण का शुभ समय

बताया जा रहा है कि, पारण का शुभ समय 5 सितंबर को सुबह 6.01 मिनट के बाद

क्या जन्माष्टमी का व्रत रात को खोल सकते है?

बहुत से लोग रात को 12 बजे कन्हा जी के जन्मोत्सव, अभिषेक और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण कर लेते हैं। लेकिन धर्मशास्त्रीय नियम के अनुसार अगले दिन सूर्योदय के बाद अष्टमी और रोहिणी की स्थिति देखकर पारण करना अधिक शुभ माना गया हैं।

रात में पारण का शुभ समय

रात 12.43 मिनट के बाद का मुहूर्त है

जन्माष्टमी व्रत का पारण कैसे करें?

जन्माष्टमी व्रत का पारण यानी खोलने से पहले सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें। घर के मंदिर में पूजा व दीपक जलाकर बाल गोपाल को भोग लगाएं।

भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया गया प्रसाद ग्रहण करें। पारण की शुरुआत चरणामृत, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी या ताजे फल से होनी चाहिए है। चरणामृत ग्रहण करने के बाद थोड़ा प्रसाद लेकर व्रत खोलें।

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