साल 2025 में इस दिन से शुरू है रमजान, ईद-उल-फितर की तारीख़ नोट कर लें
रहमत और बरकतों का महीना रमजान इस्लाम धर्म में बड़ा महत्व रखता है। साल 2025 में रमजान की शुरुआत 1 मार्च से होगी और इसकी समाप्ति 30 मार्च को होगी। बता दें, रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नवां महीना होता है।
- Written By: सीमा कुमारी
साल 2025 में इस दिन से शुरू है रमजान,( सौ.सोशल मीडिया)
Ramadan 2025: रहमत और बरकतों का महीना रमजान इस्लाम धर्म में बड़ा महत्व रखता है। साल 2025 में रमजान की शुरुआत 1 मार्च से होगी और इसकी समाप्ति 30 मार्च को होगी। रमजान महीने में मुस्लिम लोग रोजे रखते हैं और खुदा की इबादत करते हैं। फिर महीने के अंत में ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है। इस महीने में मुस्लिम लोग कुरान को पढ़ना बेहद शुभ मानते हैं। रमजान का महीना 29 या 30 दिन का होता है। आइए आपको बताते हैं 2025 में रमजान की तारीख क्या रहेगी।
कब है रमजान 2025
साल 2025 में रमजान की शुरुआत 1 मार्च से होगी और इसकी समाप्ति 30 मार्च को होगी। बता दें रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नवां महीना होता है। इस महीने को इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोग बेहद पवित्र मानते हैं।
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2025 में ईद उल फितर कब है
2025 में ईद उल फितर का त्योहार 31 मार्च को मनाया जाएगा। बता दें ये पर्व शव्वाल महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है।
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जानिए रमजान के नियम और परंपराएं
मुस्लिम धर्म गुरु के अनुसार, रमजान में मुस्लिम लोग रोजा रखकर खुदा की इबादत करते हैं। रोजा सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रखा जाता है। उपवास के रोज सूर्योदय से पहले कुछ खा लिया जाता है जिसे सहरी कहा जाता है। फिर पूरे दिन न तो कुछ खाया जाता है और न ही कुछ पिया जाता है। फिर सूरज ढलने के बाद रोजा खोला जाता है जिसे इफ्तारी कहा जाता है। इसके अलावा रमजान में नमाज पढ़ने का विशेष महत्व माना गया है।
हर मुसलमान को दिन में पांच बार नमाज करना आवश्यक है और रमजान के महीने में ऐसा करना बहुत ही जरूरी माना जाता है। इस्लाम धर्म में दान की भी बड़ी अहमियत है। रमजान में नमाज के बाद जकात को ही सबसे अहम माना जाता है।
ईद-उल-फितर का क्या है महत्व
ईद-उल-फितर ईद इस्लाम के प्रमुख त्योहारों में एक है, जिसे मुस्लिम समुदाय के लोग खुशी और जश्न के साथ मनाते है। ईद-उल-फितर मनाए जाने को लेकर ऐसा माना जाता है कि, इसी खास दिन पर पैगंबर हजरत मुहम्मद ने बद्र के युद्ध में जीत हासिल की थी। इसी खुशी में हर साल ईद मनाई जाती है।
कहा जाता है कि 624 ई. में पहली बार ईद-उल-फितर मनाया गया था। खुशी, जश्न, प्रेम, सौहार्द, अमन, चैन और भाईचारे को बढ़ावा देना ही ईद पर्व का महत्व है। इसलिए ईद के दिन लोग गले मिलते हैं और एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं।
