कब है वैशाख माह का पहला प्रदोष व्रत, जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
हिंदू धर्म में देवों के देव महादेव की पूजा का बड़ा महत्व है। आपको बता दें, महाकाल की विशेष कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत का दिन सबसे शुभ एवं मनोवांछित फल प्रदान हेतु बताया गया है।
- Written By: सीमा कुमारी
प्रदोष व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
Shukra Pradosh Vrat 2025: हिंदू धर्म में देवों के देव महादेव की पूजा का बड़ा महत्व है। आपको बता दें, महाकाल की विशेष कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत का दिन सबसे शुभ एवं मनोवांछित फल प्रदान हेतु बताया गया है। मान्यता है कि, इस दिन की गई उपासना से शिव परिवार का आशीर्वाद मिलता है और सभी संकट टल जाते हैं।
प्रदोष व्रत हर महीने के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। इस बार वैशाख माह यानी अप्रैल महीने की प्रदोष व्रत 25 अप्रैल 2025 को रखा जाएगा। इस तिथि पर यदि सच्चे भाव से भगवान शिव को खीर का भोग व बेलपत्र अर्पित किया जाए, तो मनचाहा वर पाने की कामना पूर्ण होती हैं। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानते हैं…
जानिए वैशाख माह की प्रदोष व्रत तिथि
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आपको बता दें, इस बार वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 25 अप्रैल को सुबह 11: 44 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 26 अप्रैल के दिन सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर है। उदया तिथि के मुताबिक 25 अप्रैल 2025 को वैशाख माह का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन शुक्रवार होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष कहा जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
25 अप्रैल 2025 शुक्र प्रदोष व्रत के दिन महादेव की पूजा के लिए शाम 6 बजकर 53 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 3 मिनट तक का शुभ मुहूर्त बन रहा है। आप इस अवधि में महाकाल की उपासना कर सकते हैं।
ऐसे करें देवों के देव महादेव की पूजा
प्रदोष व्रत पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थल पर शिवलिंग स्थापित करें।
इसके बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
अब आप बेलपत्र, फूल, गुड़हल के फूल और कुछ फल अर्पित करें।
इस दौरान आप महादेव को मिठाई का भोग भी लगा सकते हैं।
इसके बाद शुक्र प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें।
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भगवान शिव की आरती करें।
इस दौरान आप महादेव के साथ-साथ पूरे शिव परिवार की आरती भी कर सकते हैं।
अंत में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए गलतियों की क्षमा मांगे।
