मई में इस दिन पड़ रही है दुर्गाष्टमी, सही तिथि के साथ पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानिए
मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत और पूजा करने से देवी दर्गा की विशेष कृपा होती है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से घर में सकारात्मकता का संचार होता है और नकारात्मकता दूर होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
मासिक दुर्गाष्टमी (सौ.सोशल मीडिया)
Masik Durgashtami 2025:हिन्दू धर्म में हर पर्व और त्योहार का अपना अलग ही महत्व होता है। आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस बार मई महीने की मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत 5 मई को रखी जाएगी।
ज्योतिषयों के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत और पूजा करने से देवी दर्गा की विशेष कृपा होती है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से घर में सकारात्मकता का संचार होता है और नकारात्मकता दूर होती है।
आपको बता दें, यह व्रत करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती हैं। इससे भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। ऐसे में आइए जानते हैं मई के महीने में किस दिन मनाई जाएगी दुर्गाष्टमी मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
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कब है दुर्गाष्टमी
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी का शुभारंभ 04 मई 2025 दिन रविवार को सुबह 07 बजकर 18 मिनट से होगा, जो 05 मई 2025, सोमवार को सुबह 07 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगा। उदयातिथि के अनुसार, दुर्गाष्टमी वैशाख माह शुक्ल पक्ष के दिन 5 मई को मनाई जाएगी।
ऐसे करें मासिक दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा की पूजा
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल से शुद्ध करें। मां दुर्गा की मूर्ति सामने दीप जलाएं और व्रत का संकल्प लें। मां दुर्गा को लाल फूल, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें। मां दुर्गा को फल, मिठाई या पंचामृत का भोग लगाएं। आखिर में, मां दुर्गा की आरती करें और उनसे अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करें।
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जानिए दुर्गाष्टमी की महिमा
दुर्गाष्टमी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है। यह पर्व देवी दुर्गा के प्रति आस्था और श्राद्धा प्रकट करने के लिए होता है। धार्मिक मान्यतानुसार, अष्टमी के दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वधकर संपूर्ण ब्रह्मांड को उसके अत्याचारों से बचाया था।
इस दिन मां दुर्गा के भक्त विधि-विधान से मां की पूजा अर्चना करते हैं, तो घर में सुख-समृद्धि आती है साथ ही जातक की सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं।
