क्या है जवारे विसर्जन की सही विधि? जानिए क्या हैं इसके नियम और मंत्र

Jawara Visarjan Rules: जवारे विसर्जन नवरात्रि पूजा का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसे पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करना चाहिए। इस लेख में जानिए जवारे विसर्जन की सही विधि, जरूरी नियम और पवित्र मंत्र।
Jawara Visarjan Vidhi:
जवारे विसर्जन (सौ.AI)
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Jawara Visarjan Vidhi: नौ दिनों की शक्ति उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्र के समापन जवारे यानी जौ विसर्जन के साथ होता है। हिंदू धर्म में जवारे को सुख-समृद्धि, उन्नति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जवारे जितनी अच्छी तरह उगती हैं, माता रानी की कृपा उतनी ही अधिक बरसती है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि जवारे का विसर्जन नवमी को करना चाहिए या दशमी को? आइए यहां विस्तार से जानते हैं।

जवारे विसर्जन की शुभ तिथि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र नवरात्र यानि रामनवमी के बाद दशमी तिथि के दिन जवारे का विसर्जन किया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष दशमी तिथि 28 मार्च 2026, शनिवार को पड़ रही है और ऐसे में जवारे का विसर्जन 28 मार्च को करना शुभ शुभ बताया जा रहा है।

जवारे विसर्जन का क्या है शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, जवारे विसर्जन का शुभ मुहूर्त 28 मार्च की सुबह 7 बजकर 58 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।

इसके बाद दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजित मुहूर्त रहेगा और इसे भी शुभ मुहूर्त माना जाता है।

फिर दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से दोपहर 2 बजकर 3 मिनट तक और 3 बजकर 34 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 5 मिनट तक जवारे विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त है।

जवारे विसर्जन से पहले करें पूजा

  • विसर्जन से पहले जवारे की धूप, दीप, अक्षत और फूल से अंतिम पूजा करें।
  • माता दुर्गा की आरती करें और प्रार्थना करें।
  • पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए माता से क्षमा मांगें
  • विसर्जन के लिए जवारे के पात्र को सिर पर रखकर सम्मान किसी पवित्र नदी, तालाब या अन्य जल स्रोत में प्रवाहित कर दें।

जवारे विसर्जित करते समय इस मंत्र का जप करें।

"गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि। पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च।।"

          मां दुर्गा पूजा मंत्र

1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥

2. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

3. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥

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