नवरात्र में व्रत टूट गया या हो गई बड़ी भूल? तुरंत करें ये उपाय, नहीं लगेगा दोष

Navratri Vrat Rules: नवरात्र में यदि व्रत टूट जाए या कोई गलती हो जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सच्चे मन से मां दुर्गा से क्षमा मांगकर, पूजा और उपाय करने पर दोष नहीं लगता और मां की कृपा बनी रहती है।
Navratri Mistake Solution
मां दुर्गा (सौ. Gemini)
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Navratri Fast Broken What To Do: पूरे देशभर में नवरात्र का महापर्व श्रद्धा भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि के इन पावन दिनों का अपना अलग ही महत्व होता है। हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना होती है।

आज नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा हो रही है। धर्म ग्रथों में बताया गया है कि इन 9 दिनों सच्चे मन से की गई आराधना से मां दुर्गा प्रसन्न होती है अपने भक्तों की सभी कष्ट दूर करती हैं और सुख-समृद्धि का वरदान देती है।

नवरात्र व्रत-पूजा का टूटना

कई बार जाने-अनजाने में व्रत-पूजा में कुछ गलतियां हो जाती हैं। जैसे- गलती से कुछ खा लेना जिससे व्रत टूट जाए, पूजा में भूल हो जाना आदि। जिसके वजह व्रत खंडित हो जाता है। ऐसे में घबराएं नहीं और शास्‍त्रों में बताए गए सरल उपाय कर सकते है।

गलती से टूट गया है व्रत तुरंत कर लें यह काम

  • हवन करें

शास्‍त्रों के अनुसार, अगर जाने-अनजाने में व्रत टूट गयी है, तो ऐसे में घबराएं नहीं। बल्कि घर में छोटा सा हवन करें। आम की लकड़ियों पर घी, कपूर और हवन सामग्री से मां के नाम की आहुतियां दें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और आपका व्रत पुनः 'संकल्पित' माना जाता है। हवन के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।

  • मां रानी से माफी मांगे

यदि व्रत में भूल से कुछ खा लें, तो मां दुर्गा से सच्चे मन से क्षमा मांगें। हाथ-मुंह धोकर साफ कपड़े पहनें, दीपक जलाएं और मंत्र जाप करें। सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य भी करें।

  • गरीबों को दान-पुण्‍य करें

यदि घर में घटस्थापना या अखंड ज्योत जल रही हो और सूतक लग जाए, तो किसी पड़ोसी या मित्र से मां दुर्गा की पूजा, भोग और आरती करवाएं। बाद में विधि-विधान से जवारे का विसर्जन करें और कन्या पूजन न कर पाने पर गरीबों को दान-पुण्य करें।

  • दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करें

अखंड ज्‍योत बुझ गई है तो ऐसा हो तो घबराएं नहीं। पवित्र स्थिति में अखंड ज्‍योत में तेल-घी डालें। फिर मां दुर्गा से गलती के लिए क्षमायाचना करें। इसके बाद दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करें या मां दुर्गा के मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

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