

Bappa Ki Sthapana Kaise Kare: गणेश चतुर्थी अब कुछ दिनों में आने वाला है। गणपति को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है, जो भक्तों के जीवन से सभी बाधाओं को दूर कर सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। यही कारण है कि इस दिन घर-घर में बप्पा का आगमन होता है। अगर आप भी इस बार पहली बार घर पर गणपति बिठाने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी नियम और परंपराओं का पालन करना बेहद आवश्यक है। जरूरी है। जानिए क्या है नियम हैं।
अगर आप भी इस बार पहली बार घर पर गणपति बिठाने जा रहे हैं, तो गणपति को घर लाने और स्थापित करने के लिए शुभ मुहूर्त जरूर देखें। पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि के दौरान दिन के समय स्थापना करना उत्तम माना जाता है।
विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता की पूजा के लिए पूजन सामग्री से लेकर पूरी विधि का पालन करें। आवश्यक सामग्री रखें जैसे लाल या पीले फूल, दूर्वा , मोदक या लड्डू, धूप, दीप, कपूर, सिंदूर, हल्दी, चंदन। पूजा के दौरान गणपति अथर्वशीर्ष, गणेश मंत्र और गणेश चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है।
गणेश जी की मूर्ति सदैव इको फ्रैंडली और मिट्टी की होनी चाहिए। मूर्ति घर के बजट और स्थान के अनुसार छोटी या मध्यम रखें। ध्यान रखें कि एक से डेढ़ फीट से बड़ी मूर्ति न हो। साथ ही दाएं सूंड वाली गणेश मूर्ति घर में स्थापित करने से बचना चाहिए।
गणेश जी की मूर्ति उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण या घर के पूजा स्थल में स्थापित करें। मूर्ति को लकड़ी के पाटे पर लाल/पीले कपड़े बिछाकर विराजमान करें। मूर्ति के चारों ओर स्वच्छता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहनी चाहिए। पास में कलश और नारियल रखना न भूलें।
गणेश जी की पूजा में मोदक का भोग लगाना न भूलें। गणेश जी को मोदक बहुत प्रिय है, इसलिए प्रतिदिन उन्हें मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इसके अलावा फल, पंचामृत और बेसन के लड्डू भी अर्पित किए जा सकते हैं।
गणेश चतुर्थी पर गणपति की स्थापना 1 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन की जा सकती है। विसर्जन के समय "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" का जयघोष करें। कोशिश करें कि मूर्ति को नदी या तालाब की जगह घर के ही जल-पात्र या कृत्रिम तालाब में विसर्जित करें ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे।
गणपति स्थापना के बाद मूर्ति को अकेला न छोड़ें। हर सुबह-शाम दीपक जलाकर आरती करें। घर में शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखें। पूजा में नीले या काले कपड़े का उपयोग न करें।