Vat Savitri: शनिवार को है वट सावित्री व्रत, ये 7 विशेष नियम तुरंत नोट कर लीजिए

Vat Savitri Vrat Katha: वट सावित्री व्रत में कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इन 7 नियमों को सही तरीके से अपनाने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
Vat Savitri Vrat Rules
वट सावित्री व्रत (Source. Pinterest)
Published on: 
Updated on: 

Vat Savitri Vrat Rules: वैसे तो, हिंदू सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए कई व्रत रखे जाते हैं, लेकिन वट सावित्री व्रत का अलग ही महत्व है। जो हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन यानी शनि जयंती के दिन मनाई जाती है। इस बार 16 मई को मनाई जा रही है।

वट वृक्ष की पूजा का आध्यात्मिक महत्व

धर्म शास्त्रों में वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष की पूजा का आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। इस दिन विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा करने से पति को लंबी आयु प्राप्त होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसके अलावा,परिवार पर आने वाले संकट भी दूर होते हैं। यदि आप भी इस वर्ष यह व्रत रखने जा रही हैं, तो पूजा के सटीक समय और शास्त्रों में बताए गए उन 7 अनिवार्य नियमों को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है, जिनके बिना यह साधना अधूरी मानी जाती है।

हर व्रती को पता होने चाहिए ये नियम

  • वट वृक्ष की परिक्रमा

वट सावित्री व्रत की पूजा में वट वृक्ष की कम से कम 7 या 108 बार परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। परिक्रमा के दौरान कच्चा सूत वृक्ष के तने पर लपेटना आवश्यक होता है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

  • बाँस के पंखे का दान

पूजा सामग्री में बाँस का पंखा (बेना) अवश्य शामिल करें। पूजा के बाद इस पंखे से वट वृक्ष को हवा दी जाती है और फिर इसे दान करने की परंपरा निभाई जाती है, जो पुण्यदायी मानी जाती है।

  • भीगे चने का भोग

इस व्रत में भीगे हुए चने का विशेष महत्व होता है। इसे प्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता है और व्रत खोलते समय इसी का सेवन किया जाता है।

  • सोलह श्रृंगार

व्रती महिलाओं के लिए इस दिन सोलह श्रृंगार करना शुभ माना जाता है। लाल या पीली साड़ी पहनना उत्तम है, जबकि काले वस्त्रों का त्याग करना चाहिए।

  • अर्घ्य देने की विधि

वट वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध और जल मिलाकर अर्घ्य देना चाहिए। ऐसा करने से पितरों और देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

  • सुहाग सामग्री दान

पूजा के बाद सास या किसी वरिष्ठ सुहागिन महिला को वस्त्र, फल और सुहाग सामग्री का बायना देना चाहिए। उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है।

  • कथा श्रवण

व्रत के दौरान वट वृक्ष के नीचे बैठकर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना या पढ़ना आवश्यक है। बिना कथा श्रवण के व्रत पूर्ण फलदायी नहीं माना जाता।

  • पूजा के समय क्या न करें

सूर्यास्त के बाद वट वृक्ष की पूजा या स्पर्श नहीं करना चाहिए। व्रत के दौरान मन में क्रोध या द्वेष नहीं रखना चाहिए। स्वास्थ्य ठीक न होने पर निर्जला व्रत की बजाय फलाहार करना उचित माना जाता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com