Panchak: वरुथिनी एकादशी पर पंचक के साए का क्या होगा असर? नोट कीजिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पारण और उपाय
Varuthini Ekadashi Remedies And Upay:वरुथिनी एकादशी 2026 पर पंचक का प्रभाव रहेगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से कन्यादान व स्वर्णदान के समान पुण्य मिलता है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी ( सौ. सोशल मीडिया )
Panchak Effect On Varuthini Ekadashi : सनातन धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। इस साल वैशाख महीने की पहली एकादशी यानी वरूथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026 सोमवार को रखा जा रहा है। हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत को मोक्ष, सौभाग्य व पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है।
लेकिन इस बार इस तिथि पर राज पंचक भी शुरू हो रहा है। पंचक लगने के कारण लोगों के मन में इसके प्रभाव को लेकर कई सवाल है। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से।
वरुथिनी एकादशी 2026
पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी तिथि 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रात 1:16 बजे शुरू होगी और 14 अप्रैल 2026 को रात 1:08 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 13 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।
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पारण का समय: 14 अप्रैल 2026 को सुबह लगभग 6:54 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा। हरि वासर समाप्त होने के बाद ही पारण करना चाहिए। इसलिए 13 अप्रैल को व्रत रखें और 14 अप्रैल को पारण करें।
वरुथिनी एकादशी पर पंचक का प्रभाव
ज्योतिषयों के अनुसार, 13 अप्रैल से 17 अप्रैल 2026 तक राज पंचक चल रहा है। सामान्य पंचक को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, लेकिन राज पंचक सोमवार से शुरू होने वाला पंचक है, जिसे ज्योतिष में शुभ माना जाता है।
राज पंचक सुख समृद्धि और यश का प्रतीक बताया गया है। इसलिए वरुथिनी एकादशी पर राज पंचक का साया पड़ने के बावजूद व्रत और पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा।
वरुथिनी एकादशी का महत्व
स्कंदपुराण के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत दस हजार वर्ष की तपस्या के बराबर पुण्य देता है। इस व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के समय स्वर्ण दान करने जितना पुण्य प्राप्त होता है।
दुखी सधवा स्त्री यदि यह व्रत करे तो उसे सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं में राजा मान्धाता और धुन्धुमार को इस व्रत से स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी।
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पंचक में वरुथिनी एकादशी पर क्या करें और क्या ना करें?
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व्रत और पूजा सुरक्षित और फलदायी
ज्योतिषयों के अनुसार, राज पंचक शुभ होने के कारण व्रत और पूजा करना पूरी तरह सुरक्षित और फलदायी है। लेकिन कुछ कार्यों से बचें। लकड़ी या ईंधन का संग्रह ना करें।दक्षिण दिशा की यात्रा टालें।
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नया निर्माण कार्य या छत डालना टालें
वरुथिनी एकादशी व्रत से पापों का नाश, सौभाग्य, स्वास्थ्य, संतान सुख और आर्थिक उन्नति मिलती है। राज पंचक के साथ होने से इन लाभों की मात्रा और बढ़ जाती है। जो भक्त सच्चे भाव से व्रत रखते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
