शनि की साढ़ेसाती और ढैया में शरीर के इन अंगों पर मंडराता है खतरा, जानिए कहां-कहां पड़ता है प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र और लाल किताब के अनुसार ग्रह नक्षत्र हमारे शरीर के अंगों पर प्रभाव डालते हैं। ग्रहों के कारण ही हम रोग ग्रस्त होते हैं और उसी के कारण स्वस्थ भी।
- Written By: सीमा कुमारी
किन अंगों पर होता है शनिदेव का अधिकार(सौ.सोशल मीडिया)
व्यक्ति के जीवन में ग्रह नक्षत्र का बड़ा महत्व होता हैं। ज्योतिषयों के अनुसार, प्रत्येक ग्रह का शरीर के कुछ विशेष अंगों पर आधिपत्य यानी अधिकार होता हैं। अगर बात शनिदेव की करें तो उन्हें कर्मफल दाता और न्याय का देवता कहा जाता है, उनका भी मानव शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर प्रभाव होता हैं।
आपको बता दें, शनि मुख्य रूप से शरीर के उन अंगों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो स्थिरता, संरचना, धीमापन, दीर्घकालिक प्रकृति और सहनशीलता से जुड़ा होता हैं।
ज्योतिषयों के अनुसार, शनि की साढ़े साती और ढैय्या के दौरान भी शरीर के विभिन्न अंगों पर इसका प्रभाव पड़ता हैं। ऐसा माना जाता है कि साढ़े साती के शुरुआती चरण में यह मस्तिष्क और चेहरे को प्रभावित करता है, फिर दाहिनी आंख, बाईं आंख, दाहिना हाथ, बायां हाथ, और अंत में पैर और तलवे आदि पर अपना असर डालती हैं। ऐसे में आइए जानते है किन अंगों पर होता शनिदेव का अधिकार है?
सम्बंधित ख़बरें
Mango Side Effects: आम खाने से पहले यहां जान लीजिए, आपको खाना चाहिए या नहीं, किसे है ख़तरा?
Sahjan Leaves Health: सहजन के पत्ते का पानी के हैं गजब फायदे! जानकर हो जाएंगे हैरान! आज़मा कर भी देख लीजिए
Shani Jayanti Upay: शनि जयंती के दिन अपनी राशि के अनुसार चुपचाप कर लें ये उपाय, परेशानियों से मिलेगा छुटकारा!
Shani Jayanti : कब है शनि जयंती 2026? नोट कीजिए सही तारीख, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
किन अंगों पर होता है शनिदेव का अधिकार :
आंखों पर बुरा प्रभाव
ज्योतिषयों के अनुसार, शनि के दुष्प्रभाव से हमारी आंखें कमजोर हो जाती है। समय पूर्व आंखें कमजोर होने लगती हैं और भवों के बाल झड़ जाते हैं तो समझ लें कि शनि का बुरा प्रभाव है। इसको मजबूत करने के लिए आपको ऐसी चीजें खाना चाहिए जो आखों के लिए उत्तम हो। आंखों की एक्सरसाइज भी करना चाहिए। ठंडे पानी से आंखों को धोते रहना चाहिए और सुरमा लगाते रहना चाहिए।
हड्डियां और जोड़
शनि के दुष्प्रभाव से व्यक्ति को जोड़ों का दर्द गठिया, हड्डियों से संबंधित रोग होते है। यदि कुंडली में शनि अशुभ या कमजोर हो, तो व्यक्ति को जोड़ों का दर्द गठिया, हड्डियों से संबंधित रोग शरीर में कंपन या हड्डियों में कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती है। यह चोट लगने पर हड्डियों के धीरे-धीरे ठीक होने का भी संकेत हो सकता है।
दांत पर बुरा प्रभाव
शनि के दुष्प्रभाव से आंखें, हड्डियों से संबंधित रोग के अलावा दांतों से जुड़ी समस्याएं भी होने लगती है। क्योंकि शनि दांतों का भी कारक है। दांतों की समस्याएं, कैविटी, दांतों का कमजोर होना या समय से पहले झड़ना शनि के नकारात्मक प्रभाव का संकेत हो सकता है।
नाखून पर बुरा प्रभाव
शनि के दुष्प्रभाव से नाखूनों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। नाखूनों की मजबूती और स्वास्थ्य भी शनि से संबंधित है। कमजोर, भंगुर या जल्दी टूटने वाले नाखून शनि के अशुभ प्रभाव को दर्शा सकते हैं।
यह भी पढ़ें-संकष्टी चतुर्थी की पूजा इस कथा के बिना अधूरी है, विधिवत पूजा से निसंतानों को मिलेगा संतानसुख
फेफड़े और श्वसन प्रणाली
ज्योतिषीय मतों के अनुसार, शनि के दुष्प्रभाव से श्वसन संबंधी समस्याएं भी होने लगती हैं। जिसमे सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा या अन्य फेफड़ों से संबंधित बीमारियां शनि के प्रभाव में देखी जा सकती है। इसके अलावा ,कब्ज, पेट फूलना, या पुरानी पाचन संबंधी समस्याएं शनि के नकारात्मक प्रभाव का संकेत हो सकते हैं।
बाल पर बुरा प्रभाव
ज्योतिष बताते है कि, शनि के दुष्प्रभाव से बाल भी झड़ने लगते है। शनि बालों का भी प्रतिनिधित्व करता है। समय से पहले बालों का झड़ना, गंजापन, रूखे और बेजान बाल शनि के नकारात्मक प्रभाव से जुड़े हो सकते हैं।
