लोहड़ी पर आखिर क्यों जलाते है अग्नि, इसकी परिक्रमा के दौरान क्या डालना होता है शुभ

पंजाब में सिख समुदाय के लोग नाचते- गाते हुए बड़े ही धूमधाम से लोहड़ी को मनाते है। लोहड़ी पर अग्नि जलाने का महत्व होता है आखिर ऐसा क्यों और क्या कारण है।
लोहड़ी का पर्व , पंजाब
लोहड़ी की अग्नि में क्या डालते है (सौ.सोशल मीडिया)
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Lohri 2025: हिंदू धर्म में कई व्रत और त्योहार आते ही रहते है जिसे हर कोई बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते है। मकर संक्रांति से पहले पंजाब राज्य में लोहड़ी पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाने वाला है जिसमें होली की तरह ही लकड़ियों को एक साथ रखकर दहन किया जाता है। पंजाब में सिख समुदाय के लोग नाचते- गाते हुए बड़े ही धूमधाम से लोहड़ी को मनाते है। लोहड़ी पर अग्नि जलाने का महत्व होता है आखिर ऐसा क्यों और क्या कारण है चलिए जानते हैं इस लेख में...

कब मनाई जाएगी लोहड़ी 2025

आपको बताते चलें कि, यहां पर हिंदू पंचाग के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति की तिथि निर्धारित होती है। इसके अलावा इधर मकर संक्रांति की तिथि से एक दिन पहले यानि 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है। लोहड़ी का पर्व आस्था और पारंपरिक उत्सव के साथ ही कृषि का महत्व भी बताती है, इसलिए इस त्योहार को रबी फसल की कटाई के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।

जानिए लोहड़ी पर क्यों जलाते हैं अग्नि

लोहड़ी पर आग जलाने का महत्व होता है यह परंपरा बेहद पुरानी है। होलिका दहन की तरह ही लोहड़ी पर लकड़ियों का दहन किया जाता है। होलिका दहन (Holika Dahan) की जाती है और लकड़ियों का ढेर जमाकर अग्नि जलाई जाती है. उसी तरह लोहड़ी में भी अग्नि जलाने का महत्व है।

लोहड़ी की अग्नि को पवित्र माना गया है इसकी पूजा हर कोई करते है। इस अग्नि में कुछ विशेष चीजें भी अर्पित की जाती हैं, जिसे चर्खा चढ़ाना भी कहा जाता है। यहां पर लोहड़ी को लेकर ज्योतिष अनीष व्यास कहते हैं कि, लोहड़ी पर जलाई जाने वाली अग्नि का संबंध सूर्य देव (Surya Dev) और अग्नि देवता से होता है. वहीं इसी के साथ इस अग्नि से वातावरण भी शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।

जानिए लोहड़ी की अग्नि में क्या डालते है

आपको बताते चलें कि, लोहड़ी की पवित्र अग्नि में परिवार के सभी लोग मूंगफली, गजक, रेवड़ी, तिल (Til), फुलिया यानि पॉपकॉर्न आदि डालते हैं और सात बार अग्नि की परिक्रमा करते हैं। इसके साथ ही अग्नि में डाली गई चीजों को उपस्थित लोगों में बांट दिया जाता है। सभी ढोल की थाप के साथ गिद्दा और भांगड़ा करते हुए इस पर्व का सपरिवार आनंद उठाते हैं।

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