जगन्नाथ यात्रा में होते हैं तीन रथ, तीनों के नाम अलग, किस रथ में कौन विराजते हैं जानिए
जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र यात्राओं में से एक है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और दशमी तिथि तक चलती है। पुरी जगन्नाथ यात्रा में तीन रथ होते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
जगन्नाथ यात्रा के तीन रथों के क्या हैं नाम (सौ.सोशल मीडिया)
नौ दिवसीय भगवान जगन्नाथ यात्रा इस बार 27 जून से शुरु होने जा रही है। जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म का एक भव्य और श्रद्धा से मनाया जाने वाला पावन पर्व है, जिसे हर साल ओडिशा के पुरी शहर में बड़े ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
यह उत्सव भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित होता है। आपको बता दें, हिन्दू धर्म का जगन्नाथ रथ यात्रा एकमात्र ऐसा पर्व है जब भगवान मंदिर से बाहर निकलकर आम जनता के बीच आते हैं, उनके सुख-दुख में शामिल होते है। यह भगवान के पतित पावन स्वरूप को दर्शाता है, जहां वे बिना किसी भेदभाव के सभी को दर्शन देते है।
जानकार बताते है कि, रथ यात्रा के दौरान 3 रथ निकाले जाते हैं और ये तीनों रथ हर साल विशेष नीम की लकड़ी से बनाए जाते हैं, और इस रथ बनाने की प्रक्रिया में कई महीने लगते है। यह पूरी यात्रा एक विशाल धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले लेती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते है। क्या आप इन तीनों रथों के नाम जानते हैं और इन 3 रथों में कौन सवार होता है। तो आइए जानते है इस बारे में-
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जगन्नाथ यात्रा के तीन रथों के क्या हैं नाम जानिए
पहला रथ नंदीघोष
आपको बता दें, भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम नंदीघोष यानी गरुड़ध्वज है। यह तीनों रथों में सबसे बड़ा और भव्य होता है। इसका रंग मुख्य रूप से लाल और पीला होता है। इसमें कुल 16 पहिए और ऊंचाई लगभग 42.6 से 45 फीट होती है। इसके शिखर पर गरुड़ देव का प्रतीक होता है। इसे दूर से ही इसके पीले और लाल रंग से पहचाना जा सकता है।
दूसरा रथ तालध्वज
जगन्नाथ यात्रा का दूसरा रथ का नाम तालध्वज है। जो भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई बलभद्र यानी बलराम को समर्पित है। जो यात्रा में सबसे आगे चलता है। इसका रंग लाल और हरा होता है। इसमें 14 पहिए होते हैं और ऊंचाई लगभग 43.3 फीट है। इसके शिखर पर ताड़ का वृक्ष बना होता है।
तीसरा रथ पद्मध्वज/दर्पदलन
आपको बता दें,जगन्नाथ यात्रा का तीसरा रथ पद्मध्वज/दर्पदलन है जो भगवान जगन्नाथ और बलभद्र की बहन देवी सुभद्रा का रथ है, जो दोनों भाइयों के रथों के बीच में होता है। इसका रंग लाल और काला होता है। जो देवी के शक्तिशाली और सुरक्षात्मक पहलुओं है। इस रथ के शिखर पर कमल का फूल बना होता है।
जानकारों के अनुसार, जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा सनातन धर्म के सबसे प्रमुख उत्सवों में से एक माना जाता है। बता दें, उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथ यात्रा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। जगन्नाथ रथ यात्रा की मान्यताएं गहरी धार्मिक, पौराणिक और सामाजिक होती हैं।
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पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने नगर भ्रमण करने की इच्छा व्यक्त की थी। अपनी बहन की इच्छा पूरी करने के लिए भगवान जगन्नाथ और बलभद्र के साथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले थे। यह यात्रा उसी घटना का प्रतीक है। तभी से ये जगन्नाथ रथ यात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही हैं।
