Sunderkand Path: सुंदरकांड का पाठ करने से पहले ये बातें नोट कर लीजिए, वरना छोटी सी गलती पड़ेगी बहुत भारी

Sunderkand Path Rules:सुंदरकांड का पाठ भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है जानिए सुंदरकांड पाठ से पहले किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
Sunderkand Path Benefits And Precautions
भगवान हनुमान (सौ.सोशल मीडिया)
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Sunderkand Path Benefits And Precautions: महाबली हनुमान कलयुग में एक मात्र ऐसे जागृत और साक्षात देवता हैं, जिनके सामने कोई भी मायावी शक्ति नहीं टिक पाती है। हिंदू धर्म ग्रथों में आठों सिद्धियों और नौ निधियों के दाता की कृपा पाने के लिए सुंदरकांड का पाठ करना भी बहुत शुभ बताया गया है। रामचरितमानस का पांचवां अध्याय सुंदरकांड हनुमान जी की महिमा, उनके साहस और बुद्धि का अद्भुत विवरण दिया है।

सुंदरकांड का पाठ की महिमा

धर्म ग्रथों में बताया गया है कि, जहां भी सुंदरकांड का पाठ पूरी श्रद्धा एवं भक्ति से होता है, वहां हनुमान जी खुद किसी न किसी रूप में मौजूद रहते हैं। यह पाठ जीवन के बड़े से बड़े संकट को टालने और आत्मविश्वास जगाने की शक्ति रखता है।

सुंदरकांड का पाठ करते समय किन गलतियों से बचें?

  • सूतक काल में न करें

धर्म ग्रथों में हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी बताया गया हैं और उन्हें पवित्रता बहुत प्रिय है। पाठ शुरु करने से पहले स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। यदि परिवार में सूतक यानी के किसी के जन्म या मरण का समय लगा हो, तो सुंदरकांड का पाठ न करें।

  • बार-बार जगह बदलना

सुंदरकांड का पाठ करते समय इस बात का ध्यान रहें कि बार-बार जगह न बदले। जब आप सुंदरकांड का पाठ शुरु करते हैं, तो एक शांत स्थान का चयन करें और कुशा या ऊनी आसान पर बैठ जाएं। पाठ के दौरान इधर-उधर बैठना, बीच-बीच में उठना या किसी से बात करना वर्जित है। ऐसा करने से एकाग्रता समाप्त हो जाती है और पाठ का आध्यात्मिक प्रभाव खत्म हो जाता है।

  • बीच में पाठ अधूरा छोड़ना

अगर आप सुंदरकांड का पाठ करते हैं, तो इसे एक ही बार में पूरा पाठ करना चाहिए। कई लोग समय की कमी के कारण आधा पाठ आज और आधा कल करते हैं, जो कि सही नहीं है। अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है, तो आप हनुमान चलीसा या बजरंग बाण का पाठ कर सकते हैं, लेकिन सुंदरकांड को बीच में अधूरा न छोड़ें।

  • तामसिक भोजन और आचरण

यदि आप नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करते हैं या मंगलवार अथवा शनिवार को इसका विशेष व्रत एवं संकल्प रखते हैं, तो उस दिन घर में मांसाहार, शराब, प्याज और लहसुन का सेवन या उपयोग करने से परहेज करना चाहिए। साथ ही, पाठ के दौरान और पूरे दिन अपने विचारों को सकारात्मक बनाए रखें तथा किसी के प्रति द्वेष, गुस्सा या कटु वचन बोलने से बचें।

  • आरती और भोग को नजरअंदाज करना

सुंदरकांड का पाठ समाप्त होने के बाद श्री राम जी और हनुमान जी की आरती करना अनिवार्य है। इसके बाद ही उन्हें बूंदी के लड्डू , चना-चिरौंजी या फल का भोग लगाएं। आरती किए बिना और बिना प्रसाद के सुंदरकांड का पाठ पूरा नहीं माना जाता।

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