जगन्नाथ पुरी धाम से जुड़ी कुछ ऐसी बातें, जिसका विज्ञान भी नहीं खोल पाया रहस्य
जगन्नाथ मंदिर सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर से जुड़े एक या दो नहीं बल्कि कई ऐसे रहस्य हैं जिनका आज तक जवाब ना इंसान के पास है, और ना विज्ञान के पास।
- Written By: सीमा कुमारी
जगन्नाथ पुरी धाम (सौ.सोशल मीडिया)
धरती का बैकुंठ कहा जाने वाला भगवान जगन्नाथ की शुभ यात्रा 27 जून से शुरु होने जा रही है। भारत के चार प्रमुख धामों में एक जगन्नाथ पुरी न केवल अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि अपने अद्भुत रहस्यों और चमत्कारों के लिए भी प्रसिद्ध है।
ओडिशा के समुद्र तट पर स्थित यह धाम भगवान श्रीकृष्ण के जगन्नाथ स्वरूप को समर्पित है, जहां साथ में बलभद्र और सुभद्रा की भी पूजा होती है। हर वर्ष यहां आयोजित होने वाली रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। परंतु यह केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ऐसा स्थान है जहां विज्ञान के सारे नियम भी निरुत्तर हो जाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं जगन्नाथ पुरी धाम से जुड़ी हैरान करने वाले रहस्य।
जगन्नाथ पुरी धाम से जुड़ी हैरान करने वाले रहस्य :
शिखर पर लगा झंडा
जानकारों के अनुसार, जगन्नाथ पुरी के इस मंदिर के शिखर पर लहराता झंडा हमेशा हवा के विपरीत यानी उल्टा दिशा में रहता है। ऐसा क्यों होता है आज तक कोई नहीं जान सका। यह झंडा प्रतिदिन बदला जाता है और यह सेवा किसी न किसी सेवायत द्वारा बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मंदिर की ऊंचाई तक चढ़कर पूरी की जाती है।
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खाना पकने की बात करती है हैरान
आपको बता दें, इस मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए सात बर्तन एक दूसरे पर रखे जाते हैं। आश्चर्य की बात है कि सबसे ऊपर रखा बर्तन सबसे पहले पकता है, जबकि नीचे की आंच उसे सबसे बाद में छूती है। यह विधि आज भी वैसी की वैसी जारी है।
नहीं उड़ता है कोई विमान और पक्षी
जगन्नाथ मंदिर की यह बात आपको आश्चर्य में डाल देगी कि मंदिर की गुम्बद के ऊपर से न तो कभी कोई विमान गुज़रता है और न ही इसके ऊपर कोई पक्षी बैठता या उड़ता हुआ नजर आता है। यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है।
चक्र हमेशा दिखता है सीधा
बता दें, मंदिर के ऊपर स्थित सुदर्शन चक्र, जो लगभग 20 फीट व्यास का है, चाहे आप किसी भी दिशा से इसे देखें, यह सदैव आपको सामने सीधा ही नजर आता है। यह इतनी सटीकता से स्थापित किया गया है कि इसकी बनावट और दृष्टिकोण विज्ञान को भी सोचने पर मजबूर कर देती है।
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नहीं सुनाई देती है लहरों की आवाज
मंदिर के सिंह द्वार से प्रवेश करने पर समुद्र की लहरों की आवाज पूरी तरह शांत हो जाती है। लेकिन जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर निकलते हैं, लहरों की तेज आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई देती है। इसे मंदिर की वास्तुकला का चमत्कार माना जाता है।
हवा का रुख है उलटा
सामान्यतः समुद्र तट पर दिन में हवा ज़मीन की तरफ आती है और शाम को समुद्र की ओर लौट जाती है। लेकिन पुरी में यह नियम उलट है- हवा दिन में समुद्र की ओर और रात को मंदिर की ओर बहती है।
इन सभी चमत्कारों और रहस्यों के कारण जगन्नाथ पुरी धाम केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभव है, जहां आस्था और अद्भुतता दोनों अपने चरम पर दिखाई देती है।
