Sita Navami : आज सीता नवमी की पूजा में इन विशेष मंत्रों के जाप से घर आएंगी लक्ष्मी, वैवाहिक जीवन में खुशहाली
Sita Navami Tithi: सीता नवमी के दिन मां सीता की विधिवत पूजा और विशेष मंत्रों के जाप से घर में सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी का वास होता है। इस दिन श्रद्धा से की गई उपासना वैवाहिक जीवन खुशहाली आती है।
- Written By: सीमा कुमारी
माता सीता (Source. Pinterest)
Sita Navami Kab Hai 2026: आज 25 अप्रैल को सीता नवमी मनाई जा रही है। धर्म ग्रथों में यह पावन तिथि आदर्श पतिव्रता और त्याग की प्रतिमूर्ति माता सीता को समर्पित है। ऐसे में सीता नवमी के दिन मां सीता की पूजा और उपासना करने से व्यक्ति को धन धान्य की कमी नहीं रहती है। साथ ही इस दिन माता सीता के मंत्रों का जप करने से सुख समृद्धि में भी वृद्धि होती है। आइए जानते है सीता से जुड़े मंत्र।
माता सीता के मंत्र और श्लोक
ओम सीताये नम:
माता सीता का यह मंत्र बहुत ही प्रभावशाली है। इस मंत्र के जप करने से व्यक्ति के जीवन में सुख शांति बनी रहती है।
नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गीं, सीतासमारोपितवामभागाम्।
पाणौ महासायकचारुचापं, नमामि रामं रघुवंशनाथम्॥
माता सीता का श्लोक में भगवान राम माता सीता की वंदनी की जाती है। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता और प्रेम बढ़ता है।
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श्री सीतारामाय नमः
अगर किसी की लव लाइफ और पारिवारिक जीवन में कोई समस्या चल रही है तो सीता नवमी के दिन इस मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें।
माता सीता महाभागा, रामस्य परमप्रिय।
पतिव्रता धर्मनिष्ठा, नमामि त्वां जगदम्बिकाम्॥
माता सीता के इस श्लोक का पाठ करने से आपके अंदर विवेक और धैर्य बना रहता है। साथ ही शक्ति भी मिलती है।
ओम जानकीवल्लभाय स्वाहा॥
इस मंत्र का जप करने से जीवन की सारी कठिनाइयों दूर होती हैं। साथ ही जीवन में आ रही समस्याएं भी दूर होती हैं।
कैसे करें माता सीता के मंत्र जप
- सीता मंत्र जप करने से पहले स्नान करें और साफ सुथरे वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद माता सीता के मंत्रों का जप करने के लिए माता सीता के मंदिर में जाएं या घर पर ही उनकी प्रतिमा स्थापित करें।
- इसके बाद माता सीता को फूल और माला अर्पित करें।
- अब श्रृंगार की सामग्री माता सीता का अर्पित करें।
- इसके बाद भगवान राम का स्मरण करते हुए माता सीता के मंत्रों का जप शुरु करें।
सीता नवमी की महिमा
- माता लक्ष्मी का अवतार: माता सीता को धन और समृद्धि की देवी, माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सुख शांति आती है।
- पावन प्राकट्य कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा जनक जब यज्ञ के लिए भूमि जोत रहे थे, तब उन्हें हल के फल से माता सीता मिली थीं। इस प्रकार, माता सीता धरती पुत्री हैं, इसलिए उन्हें ‘भूमिजा’ भी कहा जाता है।
- अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख: मान्यता है कि सीता नवमी का व्रत रखने और माता जानकी की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। यह वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ाने के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- नारी शक्ति का प्रतीक: माता सीता त्याग, समर्पण, पवित्रता और सहनशीलता की मूरत हैं। सीता नवमी नारी शक्ति के गौरव का जश्न मनाने का दिन है।
- मनोकामना पूर्ति: इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और माता सीता व भगवान राम का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
