अक्षय तृतीया के दिन चुपचाप करें इन चीजों का दान, पैसों की तंगी हो जाएगी दूर!

Akshaya Tritiya Daan Tips: अक्षय तृतीया के दिन गुप्त रूप से दान करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
Akshaya Tritiya Par Kya Daan Kare:
माता लक्ष्मी (सौ.सोशल मीडिया)
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Akshaya Tritiya Par Kya Daan Kare: अक्षय तृतीया के दिन सोना या सोना से बने आभूषण खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन सोना खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। इस साल अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को पड़ रही है।

धार्मिक एवं लोक मान्यतानुसार, अक्षय तृतीया खरीदारी के लिए अबूझ मुहूर्त है। इसलिए इस दिन लोग सोने-चांदी समेत शुभ चीजों की खरीदारी के अलावा, कुछ विशेष वस्तुओं का गुप्त दान करने से कंगाली दूर होती है और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं अक्षय तृतीया पर किए जाने वाले गुप्त दान के बारे में -

अक्षय तृतीया पर किन चीजों का दान करना होता है शुभ

  • पंखे या मिट्टी के बर्तन करें दान

ज्योतिष -शास्त्र के अनुसार, अक्षय तृतीया पर सोने-चांदी समेत शुभ चीजों की खरीदारी के अलावा, इस दिन हाथ से चलने वाले पंखे या मिट्टी के बर्तनों का दान करें। कहा जाता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और कारोबार व करियर में सफलता मिलती हैं।

  • चने की दाल करें दान

अक्षय तृतीया के दिन सोने के समान फल देने वाली चने की दाल का दान करें। इससे गुरु बृहस्पति मजबूत होते हैं, जिससे सुख-समृद्धि बढ़ती है। अगर आप सुख-समृद्धि चाहते है तो अक्षय तृतीया के दिन चने की दाल का दान अवश्य करें ।

  • छाता या चप्पल करें दान

इस दिन जरूरतमंदों को छाता या चप्पल दान करें। कहते है इससे राहु-केतु के दोष शांत होते हैं और अचानक आने वाली विपत्तियां टल जाती हैं।

  • सत्तू और गुड़ करें दान

इस दिन गुप्त रूप से सत्तू और गुड़ का दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और धन के रास्ते में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

  • जल का करें दान

अक्षय तृतीया के दिन जल का दान करें। प्यासे को पानी पिलाना बहुत ही पुण्य काम होता है. इस दिन किसी मंदिर में मिट्टी का घड़ा दान करें। इससे कुंडली के अशुभ ग्रहों के प्रभावों में कमी आती है और घर में बरकत आती है।

दान के समय किन बातों का रखें ध्यान

सनातन धर्म में दान करना अत्यंत पुण्य और श्रेष्ठ कर्म माना गया है। यह केवल किसी को वस्तु देना नहीं, बल्कि अपने भीतर की करुणा, त्याग और सेवा भावना को प्रकट करना होता है। हमेशा गुप्त रूप से करें यानी दान करते समय दिखावा न करें। दान हमेशा प्रसन्न मन और निस्वार्थ भाव से करें. तामसिक चीजों का दान न करें।

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