Sawan 2026: शादी के बाद पहले सावन में बेटी क्यों जाती है मायके? जानिए इसकी असली वजह
Sawan 2026 Traditions: शादी के बाद पहले सावन में बेटी के मायके जाने की परंपरा सदियों पुरानी है। जानिए इस खास रीति-रिवाज का धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व, साथ ही इसके पीछे की असली वजह।
- Written By: सीमा कुमारी
शादी के बाद पहले सावन में बेटी आना ( सौ.सोशल मीडिया)
Sawan Customs For Married Women: शिव आराधना का महापर्व सावन महीना 30 जुलाई 2026 गुरुवार से हो रही है, जिसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगा। सावन का महीना सिर्फ शिव आराधना तक नहीं होता, बल्कि ये पावन महीना पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी माना जाता है।
धार्मिक एवं लोक मान्यताएं हैं कि इस माह में विवाहित बेटियों के कदम मायके में पड़ना बहुत शुभ होता है। कहा जाता है कि इससे बेटी और उसके मायके के बीच स्नेह बना रहता है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जिन परिवारों और घरों में इस परंपरा को
निभाया जाता है, वहां बेटियों के सौभाग्य से हमेशा परिवार की उन्नति होती है।
सावन में बेटी का मायके आना है क्यों शुभ माना जाता है ?
लोक और ज्योतिष मान्यता है कि, विवाह के बाद पहले सावन में बेटी का मायके आना बहुत शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे बेटी को मानसिक और भावनात्मक सुकून मिलता है और परिवार के सदस्यों के बीच संबंध प्रगाढ़ होते है। परिवार की उन्नति होती है और घर में खुशहाली आती है। अक्सर देखा जाता है कि शादी के बाद बेटियों के ससुराल जाने से मायके में बहुत सूनापन आ जाता है।
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इसलिए कहते हैं कि सावन में उसके घर लौटने से सुख-संपन्नता और खुशहाली भी लौट आती है। वैसे तो इस परंपरा को नव विवाहित बेटियों के लिए खास माना जाता है। लेकिन जिन महिलाओं की शादी को काफी समय हो चुका है, वो भी इस परंपरा को निभा सकती है।
सावन में कैसे करें नवविवाहित बेटी का स्वागत जानिए
सावन में नवविवाहित बेटी के मायके आने पर दहलीज पर उसकी आरती करें।
माथे पर रोली का तिलक लगाकर उस पर अक्षत लगाएं।
बेटी का मुंह मिठाई या सावन के विशेष पकवान जैसे- घेवर, मालपुआ, खीर आदि खिलातकर मीठा करें।
बेटी के हाथों से एक तुलसी का पौधा भी अपने घर-आंगन में लगवाएं।
बेटी को श्रृंगार की सामग्री या कोई अच्छा सा गिफ्ट दें।
