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Satuan Sankranti: किस दिन है सतुआ संक्रांति? जानिए इस दिन का महत्व

Satuan Sankranti Sgnificance: सतुआ संक्रांति का दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन सत्तू का दान और पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Apr 13, 2026 | 11:00 PM

सतुआ संक्रांति ( सौ .सोशल मीडिया)

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Satuan Sankranti date 2026:  सतुआ संक्रांति का पर्व सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता हैं। यह पर्व हर साल मेष संक्रांति के दिन मनाया जाता हैं। खासतौर पर , उत्तर भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि राज्यों​ में अलग ही धूम देखने को मिलती हैं। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, सतुआ संक्रांति का पर्व 14 अप्रैल 2026, मंगलवार के दिन मनाया जा रहा हैं।

सूर्यदेव के मेष राशि में जाते ही खरमास समाप्त हो जाता है और सभी मांगलिक कार्य जैसे शादी, सगाई और गृहप्रवेश आदि प्रारंभ हो जाते हैं। सूर्य के मेष में प्रवेश करते ही दिन भी बड़े होने लगते हैं।

सतुआ संक्रांति का पर्व महत्व

गर्मी की शुरुआत में मनाये जाने वाले इस पावन पर्व पर किसी जलतीर्थ पर जाकर स्नान और दान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया हैं। शास्त्रों के अनुसार कोई भी दान ऋतु के अनुकूल होना चाहिए।

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ऐसे में गर्मियों की शुरुआत में दिया जाने वाला सत्तू आदि का दान पुण्य की प्राप्ति के साथ परोपकार का भी जरिया बनता हैं।

सतुआ संक्रांति पर किन चीजों का करें दान?

  • सत्तू
  • गुड़ और चना
  • जल से भरा घड़ा या मटकी
  • मौसमी फल
  • वस्त्र (विशेषकर सफेद या हल्के रंग के)
  • अन्न और भोजन सामग्री
  • पंखा या छाता (गर्मी से राहत देने वाली वस्तुएं)

मान्यता है कि इन चीजों का दान करने से पापों का नाश होता है, सुख-समृद्धि बढ़ती है और जीवन में शांति आती है।

Satuan Sankranti सतुआ संक्रांति पर क्यों किया जाता है सत्तू का दान?

सतुआ संक्रांति पर सत्तू का दान इसलिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसे शुद्ध, पौष्टिक और गर्मी से राहत देने वाला आहार माना जाता है। इस समय सूर्य की तपिश बढ़ जाती है और शरीर में गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस होता है, ऐसे में सत्तू शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों प्रदान करता है।

यह भी पढ़ें-Adhik Maas Rules 2026: अधिक मास 2026 में भूल से भी न करें ये गलतियां, साल भर रहेगा पछतावा!

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सत्तू का दान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ कम होती हैं। सत्तू को गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए भी अत्यंत उपयोगी माना जाता है क्योंकि यह सस्ता होने के साथ-साथ पेट को लंबे समय तक भरा रखता है।

इसलिए इसे दान करने से भूखों की मदद होती है और दानकर्ता को संतोष एवं शुभ फल प्राप्त होते हैं। सतुआ संक्रांति पर सत्तू का दान सूर्यदेव को प्रसन्न करने और स्वास्थ्य, समृद्धि तथा सौभाग्य बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है।

Satuan sankranti date importance rituals significance 2026

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Published On: Apr 13, 2026 | 11:00 PM

Topics:  

  • Dharma
  • Religion News
  • Sanatan Hindu religion

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