जुलाई में कब रखा जाएगा कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत? जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत का महत्व
Sankashti Chaturthi Vrat Date: जुलाई में पड़ने वाली कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। जानें इस व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि ।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान गणेश (सौ.जैमिनी)
Krishnapingal Sankashti Chaturthi Vrat Date: 30 जून से आषाढ़ माह शुरु हो चुकी है। इस महीने कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 3 जुलाई 2026, शुक्रवार को मनाई जा रहीं है। हिंदू धर्म में गणेश जी बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के देवता माने जाते है। धार्मिक मान्यता है कि, इस दिन व्रत करने वालों को हर दिशा में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है।
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग
ज्योतिषयों के अनुसार, इस बार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जिसमें विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।इस संकष्टी चतुर्थी के दिन भद्रा और पंचक है। इस व्रत में रात को चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं, तभी व्रत पूरा होता है।
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 3 जुलाई 2026, सुबह 11:21 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 4 जुलाई 2026, दोपहर 12:40 बजे तक
सम्बंधित ख़बरें
अमरनाथ गुफा का ऐसा रहस्य, जिसे जानकर आज भी हैरान रह जाते हैं लोग! आखिर क्यों बदलता है हिमलिंग का आकार?
तीन लोग साथ हों तो काम क्यों टालते हैं बड़े-बुजुर्ग? जानिए ‘तीन तिगाड़ा’ वाली मान्यता का असली कारण
सावन आने से पहले घर में छिपी ये 5 चीजें बदल सकती हैं आपकी किस्मत! कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती?
UP में धर्मांतरण के आरोपों के बीच नया मामला: बागपत के सिपाही ने हनी ट्रैप में फंसाने का लगाया आरोप
चंद्रोदय: रात 09:51 बजे (स्थान के अनुसार समय में थोड़ा बदलाव संभव है)
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में रात्रि के समय चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य माना जाता है। चूंकि 3 जुलाई की रात को चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए यह व्रत 3 जुलाई 2026 को ही रखा जाएगा।
ये भी पढ़ें- अमरनाथ गुफा का ऐसा रहस्य, जिसे जानकर आज भी हैरान रह जाते हैं लोग! आखिर क्यों बदलता है हिमलिंग का आकार?
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर भगवान गणेश के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
- दिनभर फलाहार करें या अपनी श्रद्धा एवं क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करें।
पूजा स्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। - उन्हें लाल पुष्प, अक्षत, चंदन और प्रिय दूर्वा अर्पित करें. गणपति बप्पा को मोदक या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।
- इसके बाद ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें. संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें. अंत में भगवान गणेश की आरती करें।
- रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल और दूध से अर्घ्य अर्पित करें. चंद्र देव की पूजा करने के पश्चात ही अपना व्रत खोलें ।
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने के लाभ
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने और गणेश जी के ‘कृष्णपिंगल’ स्वरूप की पूजा करने से भक्तों के सभी दुखों का नाश होता है।
गणेश जी का ‘कृष्णपिंगल’ स्वरूप काले वर्ण का होता है इस रूप की पूजा करने से काम में आने वाली सभी बाधाओं और विघ्नों का अंत होता है जो भक्त इस दिन श्रद्धा और विधि अनुसार व्रत रखें तो भय, भ्रम और मानसिक तनाव से मुक्ति मिल जाती है।
