

Ganesh Utsav Akhand Jyot: इस वर्ष 2026 में गणेश उत्सव की शुरुआत 14 सितंबर 2026 सोमवार से होने जा रहा है और इसका समापन 10 दिनों के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन के साथ होगा। किसी भी धर्मिक अनुष्ठान चाहे वो नवरात्रि का पर्व हो या गणेश उत्सव। इस दौरान अखंड जोत जलाने की विशेष परम्परा है। अगर आप गणेश उत्सव के दौरान अखंड ज्योत जलाते हैं, तो कुछ विशेष नियमों और सावधानियों का पालन करना जरूरी होता है, ताकि, पूजा खंडित न
सीधे जमीन पर न रखें
गणेश उत्सव के दौरान अखंड ज्योत जलाने के दौरान दीपक को कभी भी सीधे फर्श या जमीन पर न रखें । इसे हमेशा अष्टदल कमल बनाकर किसी चौकी या आसन पर रखें।
सही दिशा में रखें
अखंड ज्योत जलाने के दौरान सही दिशा का भी ख़ास ख्याल रखें। घी से जलाई जाने वाली दीपक को भगवान की मूर्ति या स्थापना के दहिने ओर रखना चाहिए, जबकि तेल की जोत को बाईं ओर रखना शुभ माना जाता है।
घर को सूना या अकेला न छोड़े
लोक एवं ज्योतिष मान्यता के अनुसार, अखंड जोत प्रज्वलित करने के बादकभी भी सूना या अकेला नकभी भी सूना या अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। परिवार के किसी न किसी सदस्य को घर में उपस्थित रहना चाहिए और बाहर जाते समय घर पर ताला नहीं लगाना चाहिए।
दीपक को फूंक मारकर न बुझाए
शास्त्रों के अनुसार, दीपक को कभी भी भूलकर भी फूंक मारकर या मुंह से नहीं बुझाना चाहिए। उत्सव या व्रत पूरा होने के बाद ज्योति को अपने आप स्वाभाविक रूप से शांत होने देना चाहिए।
अखंड दीपक में घी या तेल डालते समय या बाती ठीक करते वक्त हमेशा पास में एक छोटा अलग दीपक जरूर जलाकर रखना चाहिए। यदि मुख्य जोत गलती से बुझ जाए, तो उस छोटे दीपक की सहायता से उसे तुरंत दोबारा प्रज्वलित किया जा सके।
घी या तेल का प्रयोग करें
अखंड ज्योत जलाने के लिए घी या तेल का प्रयोग करें। न किपाम ऑयल वाले नकली घी का प्रयोग न करें। शास्त्रों में हमेशा शुद्ध देसी गाय के घी या तिल के तेल का ही उपयोग करने की बात कही गयी है। अखंड ज्योत की बाती के लिए मौली धागा को शुभ बताया गया है।