मुख्य द्वार पर दीपक जलाने के नियम, ( सौ.सोशल मीडिया)
Diya Jalane Ke Niyam:हिंदू धर्म में दीपक जलाने को ज्ञान और शुभता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। सनातन मान्यताओं के मुताबिक यदि आप अपने घर में रोजाना दीपक जलाते हैं तो इससे आपको घर में सुख-शांति का माहौल देखने को मिलता है।
साथ ही इससे पॉजिटिव एनर्जी आती है और नेगेटिव एनर्जी आपके परिवार से दूर बनी रहती है। ऐसी मान्यता है कि शाम को माता लक्ष्मी का प्रवेश घर में होता है, इसलिए लोग घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाते हैं।
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लेकिन,आपको बता दें, कई लोग दीपक जलाते समय कुछ गलती भी करते है। इससे माता लक्ष्मी रुठ जाती है और आपके घर में नकारात्मकता आ सकती है। ऐसे में आइए जानते है दीपक जलाने के नियमों के बारे में –
दीपक जलाने के नियम
ज्योतिषयों के अनुसार, प्रदोष काल यानी शाम के समय घर के मुख्य द्वार को खोल दें। उसके बाहर घी का दीपक माता लक्ष्मी के लिए जलाएं। रुई की बाती का इस्तेमाल करें। उस दीपक को मुख्य द्वार के बाएं तरफ रखना चाहिए।
यदि आपके पास घी नहीं हैं तो तिल या सरसों के तेल का दीपक भी जला सकते हैं, लेकिन इसे दाईं ओर रखें।
जहां पर दीपक रखें, वहीं पर एक लोटे में या गिलास में पानी भी रख दें। दीपक जलाने से अंधकार दूर होगा और जल नकारात्मक शक्ति को नष्ट करता है।
दीप जलाने के बाद बहुत से लोग अपने मुख्य द्वार को बंद कर देते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। यदि माता लक्ष्मी के आगमन के लिए दीप जलाया है और द्वार बंद कर देंगे तो घर में उनका प्रवेश कैसे होगा ?
कई जगह की कमी के कारण लोग मुख्य द्वार के पास ही जूते-चप्पल या कोने में कूड़ेदान रख देते हैं। ये वस्तुएं वहां पर नकारात्मक ऊर्जा पैदा करती हैं। जूते-चप्पल का संबंध शनि देव से माना जाता है। इससे आप उस स्थान पर शनि की उपस्थिति को बढ़ा देते हैं। ऐसा बिल्कुल न करें।
घर के मुख्य द्वार के बाहर सूर्यास्त होने के बाद जब अंधेरा होने लगे यानी प्रदोष काल प्रारंभ हो जाए तो उस समय दीपक जलाना चाहिए।