रोहिणी नक्षत्र का श्रीकृष्ण से क्या है संबंध? रोहिणी व्रत में पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त जानिए

Rohini Vrat 2026: रोहिणी नक्षत्र का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से विशेष रूप से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि उनका जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। जानें रोहिणी व्रत 2026 की तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त।
Rohini Vrat February 2026 Kab Hai
रोहिणी व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
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Rohini Vrat February 2026 Kab Hai: व्रत त्योहार की दृष्टि से देखें तो फाल्गुन महीने का विशेष महत्व होता है। इस महीने में कई त्योहार और व्रत पड़ते है। इन्हीं में से एक रोहिणी व्रत भी। जो हर महीने शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर रखा जाता है। इस बार फरवरी महीने का रोहिणी व्रत बुधवार 25 फरवरी 2026 को है।

जैन और हिंदू दोनों ही समुदायों में रोहिणी व्रत का बड़ा महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस व्रत और नक्षत्र का भगवान श्री कृष्ण से एक अटूट संबंध है? आइए जानते हैं इसके पीछे का रहस्य और इस दिन के शुभ मुहूर्त।

रोहिणी व्रत का महत्व

सनातन धर्म में रोहिणी व्रत का खास महत्व है। यह पर्व हर महीने धूमधाम से मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर जैन धर्म के अनुयायी या साधक स्नान-ध्यान के बाद भक्ति भाव से भगवान वासुपूज्य की पूजा करते हैं। वहीं, मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। महिला और पुरुष दोनों वर्ग के लोग रोहिणी व्रत रख सकते हैं।

रोहिणी व्रत 2026: तारीख और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 25 फरवरी 2026 को रोहिणी व्रत रखा जाएगा।

इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इस समय पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस शुभ अवधि में भक्त भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। माना जाता है कि रोहिणी नक्षत्र में की गई भक्ति विशेष फलदायी होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

रोहिणी नक्षत्र और भगवान श्रीकृष्ण का संबंध

रोहिणी नक्षत्र का संबंध सीधे तौर पर भगवान श्रीकृष्ण से माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, इसलिए यह नक्षत्र उन्हें अत्यंत प्रिय माना जाता है।

रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे सौंदर्य, प्रेम, समृद्धि और आकर्षण का प्रतीक माना गया है।

मान्यता है कि इस नक्षत्र में की गई पूजा, व्रत और भक्ति विशेष फलदायी होती है तथा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा विधि

  • रोहिणी व्रत पर ब्रह्म मुहूर्त में उठें और फिर घर को साफ करें।
  • गंगाजल मिले पानी से स्नान आदि कर स्वच्छ हो जाएं।
  • स्नान के बाद आचमन करें और भगवान का ध्यान कर मन में व्रत का संकल्प करें।
  • अब नए कपड़े धारण करें और सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें।
  • अब भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा शुरू करें।
  • भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा करते हुए भोग में फल अर्पित करें।
  • फूल आदि अर्पित करें. सुख समृद्धि कि प्रार्थना करें।
  • अंत में आरती कर पूजा को संपन्न करें।
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