Rishi Panchami Vrat Katha: एक गलती की वजह से बेटी के शरीर पर पड़ गए थे कीड़े, फिर ऋषि पंचमी व्रत ने बदली कहानी

Rishi Panchami Story: ऋषि पंचमी पर सप्तऋषियों की पूजा की जाती है, लेकिन क्या आपको पता है इसके पीछे की कहानी, जब एक ब्राह्मण की बेटी के शरीर पर पड़ गए थे कीड़े। जानें ऋषि पंचमी की यह रहस्यमयी कथा।
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ऋषि पंचमीफोटो.सोशल मीडिया
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Rishi Panchami Katha in Hindi: ऋषि पंचमी का व्रत हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। 15 सितंबर, मंगलवार को मनाई जा रही ऋषि पंचमी में सप्तऋषियों की पूजा की जाती है और व्रत कथा सुनी जाती है। त और आत्मशुद्धि से जुड़ा है।

ऋषि पंचमी से जुड़ी एक कथा बेहद रोचक है। इसमें एक ब्राह्मण की बेटी के शरीर पर अचानक कीड़े पड़ जाते हैं। इस घटना से पूरा परिवार अचंभित हो जाता है। बाद में इसके पीछे पिछले जन्म से जुड़ी एक गलती की बात सामने आती है। इसके बाद से ही ऋषि पंचमी का व्रत करने से सारी परेशानी खत्म हुई। आइए जानते हैं पूरी कथा।

कौन थे उत्तंक ब्राह्मण?

पौराणिक कथा के अनुसार, उत्तंक नाम के एक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुशीला के साथ रहते थे। उनकी एक बेटी थी, जिसकी शादी हो चुकी थी। कुछ समय बाद वह विधवा हो गई और अपने माता-पिता के साथ रहने लगी। एक दिन रात में जब परिवार सो रहा था, तब उनकी बेटी के शरीर पर अचानक कीड़े पड़ने लगे। सुबह जब सभी को यह बात पता चली, तो घरवाले बुरी तरह घबरा गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।

बेटी की हालत देखकर परेशान हुआ परिवार

कथा के अनुसार, बेटी की यह स्थिति देखकर माता-पिता बहुत दुखी हुए। उन्होंने इस परेशानी का कारण जानने की कोशिश की। तब उन्हें पता चला कि यह घटना उनकी बेटी के पिछले जन्म के कर्मों का नतीजा है।

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ऋषि पंचमी व्रत की बताई गई राह

ऋषि के परिवार ने इस समस्या के निवारण के लिए ऋषि पंचमी का व्रत किया। इस व्रत के जरिए सप्तऋषि की पूजा और प्रायश्चित की जाती है। ऋषि पंचमी को इसी कारण आत्मशुद्धि और अनजाने में हुई भूल के प्रायश्चित के तौर पर किया जाता है। इसके बाद बेटी ने श्रद्धा के साथ ऋषि पंचमी का व्रत किया और विधि-विधान से सप्तऋषियों की पूजा की। व्रत और पूजा के प्रभाव से उसके कष्ट दूर होने लगे।

ऋषि पंचमी के व्रत को अनजाने में हुई भूल के प्रायश्चित के तौर पर किया जाता है। इस दिन कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ समेत सप्तऋषियों की पूजा की जाती है।

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