आज तीसरे नवरात्रि पर रवि योग में करें मां चंद्रघंटा की पूजा, हर मनोकामना होगी पूरी, मिलेगी साहस और सफलता
Ravi Yog Puja: आज तीसरे नवरात्रि के दिन रवि योग का विशेष योग बन रहा है। यह दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से न केवल हर मनोकामना पूरी होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
मां चंद्रघंटा (सौ.AI)
Maa Chandraghanta: आज 21 मार्च चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है। जो मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित हैं। पौराणिक ग्रंथों में मां चंद्रघंटा को अलौकिक शक्तियां दिलाने वाली देवी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि, मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भय, दुख, रोग और नकारात्मक शक्तियां दूर होती है। भक्तों को साहस और निर्भयता प्राप्त होती है तथा जीवन की बाधाएं समाप्त होती है।
मां चंद्रघंटा की इस योग में करें उपासना
ज्योतिषयों के अनुसार, चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन रवि योग का संयोग बन रहा है। रवि योग रात 12 बजकर 37 मिनट से लेकर 22 मार्च की सुबह 6 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस बीच आप माता चंद्रघंटा की पूजा-उपासना कर सकते हैं।
मां चंद्रघंटा की पूजन विधि
इस दिन सबसे पहले एक साफ स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पास में कलश स्थापित कर उस पर नारियल रखें। चंदन, रोली, हल्दी, फूल, दूर्वा आदि से मां का पूजन करें। मां को दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाएं। अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
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मां चंद्रघंटा के बीज मंत्र
इस दिन ”ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” या ”ऊं चंद्रघंटायै नमः” मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का 108 बार जाप करने से विशेष लाभ मिलता है।
करें ये विशेष उपाय
इस दिन मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई और खीर अति प्रिय मानी जाती है। भोग लगाने के बाद इसे छोटी कन्याओं को बांटना शुभ माना जाता है। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है।
पूजा के समय घंटी या शंख जरूर बजाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है।
पूरे दिन गुस्सा, ईर्ष्या और नकारात्मक सोच से दूर रहें. मां चंद्रघंटा की पूजा में शुद्ध मन बहुत जरूरी होता है।
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मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व और लाभ:
साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि: माँ चंद्रघंटा की उपासना से साधक में अद्भुत आत्मबल और साहस का संचार होता है, जिससे वह कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बनता है।
नकारात्मकता का नाश: उनके घंटे की दिव्य ध्वनि और स्वरूप नकारात्मक शक्तियों, बुरी ऊर्जाओं और भय को दूर करता है।
शत्रुओं पर विजय: पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ ने महिषासुर का वध किया था, इसलिए उनकी पूजा से शत्रुओं पर विजय और सफलता प्राप्त होती है।
मानसिक शांति और स्थिरता: यह रूप मन को केंद्रित और शांत करने में मदद करता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
शुभता और सौभाग्य: इनकी कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है, और साधक के सभी कष्ट दूर होते हैं।
