क्या रावण बना रहा था स्वर्ग जाने की सीढ़ी? जानिए अधूरी रह गई वो रहस्यमयी कहानी

Stairway To Heaven: रामायण काल से जुड़ी कई ऐसी कथाएं हैं, जो आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। उन्हीं में से एक कहानी Ravan द्वारा स्वर्ग तक पहुंचने वाली सीढ़ी बनाने की भी है।
Ravan Building a Stairway to Heaven Tale That Remained Unfinished.
Ravan Stairway to Heaven (Source. Gemini)
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Ancient India Ravan Story: रामायण काल से जुड़ी कई ऐसी कथाएं हैं, जो आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। उन्हीं में से एक कहानी रावण द्वारा स्वर्ग तक पहुंचने वाली सीढ़ी बनाने की भी है। क्या सच में लंका के राजा रावण ऐसा कोई काम कर रहे थे? आइए जानते हैं इस दिलचस्प और रहस्यमयी कथा का सच।

कौन था रावण?

त्रेतायुग में रावण को सिर्फ एक खलनायक के रूप में नहीं, बल्कि एक महाज्ञानी, विद्वान और शक्तिशाली पंडित के रूप में भी जाना जाता था। वह एक उच्च कोटि का ज्योतिषी और भगवान शिव का परम भक्त था। रावण के पिता एक ब्राह्मण थे, जबकि उसकी मां राक्षस कुल से थीं। यही कारण था कि उसमें दोनों ही कुलों के गुण मौजूद थे ज्ञान और शक्ति का अनोखा मेल।

स्वर्ग की सीढ़ी बनाने का विचार क्यों आया?

कथाओं के अनुसार, रावण को यह ज्ञान था कि एक दिन उसकी मृत्यु निश्चित है। वह नहीं चाहता था कि उसके बाद असुर जाति का अंत हो जाए। इसी सोच के चलते उसने एक अनोखा विचार किया ऐसी सीढ़ी बनाने का, जिसके जरिए असुर सीधे स्वर्ग तक पहुंच सकें।

भगवान शिव से मिला वरदान

इस असंभव कार्य को पूरा करने के लिए रावण ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उसे वरदान दिया, लेकिन एक शर्त के साथ सीढ़ी का निर्माण एक ही दिन में पूरा करना होगा। रावण ने इस चुनौती को स्वीकार किया और तुरंत निर्माण कार्य शुरू कर दिया।

कहां-कहां बनी थीं सीढ़ियां?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण ने पहली सीढ़ी हरिद्वार में बनाई, जिसे आज "हर की पौड़ी" के नाम से जाना जाता है। इसके बाद दूसरी सीढ़ी हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पास बनाई गई, जो आज "पौड़ी वाला मंदिर" के नाम से प्रसिद्ध है। तीसरी सीढ़ी चूड़ेश्वर महादेव और चौथी किन्नर कैलाश क्षेत्र में बनाई गई बताई जाती है।

क्यों अधूरी रह गई सीढ़ी?

कहानी के अनुसार, लगातार काम करते-करते रावण बेहद थक गया। रात हो चुकी थी और वह आराम करने के लिए सो गया। सुबह जब उसकी नींद खुली, तब तक समय निकल चुका था और शर्त पूरी नहीं हो पाई। इसी कारण स्वर्ग तक जाने वाली यह सीढ़ी अधूरी रह गई।

कहानी या सच्चाई?

यह कथा पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है और इसके समर्थन में कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। फिर भी यह कहानी रावण के व्यक्तित्व और उसकी महत्वाकांक्षा को दर्शाती है।

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