रथ यात्रा से पहले सोने की झाड़ू से क्यों होती है मार्ग की सफाई? इसके पीछे छिपे हैं 3 रहस्यमयी कारण
Rath Yatra Golden Broom: रथ यात्रा शुरू होने से पहले मार्ग की सोने की झाड़ू से सफाई करने की परंपरा सदियों पुरानी है। जानिए इस विशेष अनुष्ठान के पीछे छिपे 3 रहस्यमयी कारण, इसका धार्मिक महत्व।
- Written By: सीमा कुमारी
रथ यात्रा से पहले सोने की झाड़ू से क्यों होती है (सौ.AI)
Golden Broom Before Jagannath Rath Yatra: 16 जुलाई से ‘जगन्नाथ रथ यात्रा 2026’ का शुभारंभ होने जा रहा है। हिंदू धर्म में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा सबसे प्रतिष्ठित और दिव्य धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है। इस पावन यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं।
लेकिन इस रथ यात्रा से जुड़ी एक ऐसी अनोखी परंपरा है, जो हर श्रद्धालु के मन में एक ही सवाल पैदा करती है—आखिर भगवान के रथ का मार्ग साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि सोने की झाड़ू से ही क्यों साफ किया जाता है?
पुरी में रथ यात्रा के दौरान गजपति महाराज या उनके राजवंश के उत्तराधिकारी स्वयं झाड़ू हाथ में लेकर भगवान के रथ के मार्ग की सफाई करते हैं। इस झाड़ू का हत्था सोने का होता है और इस विशेष परंपरा को ‘छेरा पहंरा’ कहा जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे तीन गहरे धार्मिक रहस्य।
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राजा भी भगवान जगन्नाथ के सामने केवल एक सेवक हैं
रथ यात्रा के दिन गजपति महाराज शाही पालकी में बैठकर रथों के पास पहुंचते हैं। सबसे पहले वे भगवान जगन्नाथ को प्रणाम करते हैं, फिर सोने की झाड़ू से रथ के चबूतरे और उसके आसपास के मार्ग की सफाई करते हैं।
इसके बाद वहां सुगंधित जल और पुष्पों का छिड़काव किया जाता है। इस परंपरा का सबसे बड़ा संदेश यही है कि चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली राजा क्यों न हो, भगवान जगन्नाथ के सामने उसकी पहचान केवल एक विनम्र सेवक की होती है।
सोने की झाड़ू अहंकार नहीं, विनम्रता का प्रतीक है
पहली नजर में सोने की झाड़ू राजसी वैभव का प्रतीक लग सकती है, लेकिन इसका वास्तविक अर्थ बिल्कुल अलग है। ‘छेरा पहंरा’ की यह परंपरा सिखाती है कि ईश्वर के सामने पद, प्रतिष्ठा, धन और सत्ता का कोई महत्व नहीं है। जब स्वयं राजा लाखों लोगों के सामने झाड़ू लगाते हैं, तो यह संदेश पूरे समाज तक पहुंचता है कि सच्ची महानता सेवा और विनम्रता में है, अहंकार में नहीं।
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क्यों मानी जाती है सोने की झाड़ू शुभता और समानता का प्रतीक?
सनातन परंपरा में सोना शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भगवान के मार्ग की सेवा के लिए सोने के हत्थे वाली झाड़ू का उपयोग किया जाता है।
इसके साथ ही यह परंपरा जगन्नाथ संस्कृति के सबसे बड़े सिद्धांत- समानता को भी दर्शाती है। जब राजा स्वयं मार्ग साफ करते हैं, तब उसके बाद किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय का भेदभाव नहीं रहता। लाखों श्रद्धालु एक साथ भगवान के रथ की रस्सियां खींचते हैं।
यही कारण है कि जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सेवा, समानता, विनम्रता और सामाजिक एकता का जीवंत संदेश भी मानी जाती है।
