Raja Parba: ओडिशा में आज मनाया जा रह है राजा पर्व, जानिए मिथुन संक्रांति की महिमा
Raja Parba 2026: ओडिशा में राजा पर्व आज पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व मिथुन संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है और प्रकृति, नारी शक्ति तथा कृषि संस्कृति से जुड़ा पर्व है।
- Written By: सीमा कुमारी
राजा पर्व (सौ.AI)
Raja Parba And Mithun Sankranti Importance: आज 15 जून को सोमवती अमावस्या के साथ मिथुन संक्रांति का पर्व भी मनाया जा रहा है। ज्योतिष एवं लोक मान्यता के अनुसार, जब सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं तब मिथुन संक्रांति मनाई जाती है। मिथुन संक्रांति का पर्व ओडिशा वासियों के लिए बड़ा महत्व रखता है। क्योंकि इस दिन ओडिशा में एक खास पर्व ‘राजा पर्व’ (रजोत्सव) मनाया जाता है।
यह पर्व आमतौर पर तीन से चार दिनों तक चलता है। इस दौरान धरती माता और नारीत्व के प्रति सम्मान और आस्था का भाव देखने को मिलता है।
आखिर राजा पर्व क्यों मनाते है?
जहां एक तरफ मिथुन संक्रांति के दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने की परंपरा है ताकि उनकी कृपा भक्तों पर बनी रहे, वहीं ओडिशा में इस दिन धरती मां की आराधना की जाती है। राजा त्योहार नारीत्व से जुड़ी परंपराओं का उत्सव मनाया जाता है।
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राजा त्योहार में ओडिशा के लोग धरती मां को विश्राम देते हैं। इन तीन दिनों तक किसान खेती-बाड़ी का काम नहीं करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व में धरती मां की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इसी कारण लोग इन दिनों धरती की पूजा-अर्चना करते हैं। अब सवाल उठता है कि इस पर्व में धरती मां को क्यों आराम दिया जाता है?
राजा पर्व से जुड़ी कई अनोखी परंपरा
राजा पर्व के दौरान महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इस दौरान महिलाओं को रसोई घर में जाने की मनाही, पैरों में चप्पल पहनने से भी रोका जाता है, उन्हें नंगे पांव रखते हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान बिना पका हुआ भोजन करने के साथ नमक खाने की भी मनाही होती है।
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हालांकि शहरी हिस्सों में रहने वाली कई महिलाएं इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, मगर ओडिशा के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं रजोत्सव त्योहार को श्रद्धा के साथ मनाती हैं।
राजा पर्व का मिथुन संक्रांति से क्या संबंध?
राजा पर्व की शुरुआत मिथुन संक्रांति के दिन से ही होती है। सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश करना ही इस उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। इसलिए ओडिशा में मिथुन संक्रांति सिर्फ एक ज्योतिषीय घटना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और लोकपर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राजा पर्व कैसे मनाया जाता है?
राजा पर्व के दौरान लोग नए कपड़े पहनते हैं, इसके अलावा झूले झूलते हैं, पारंपरिक खेलों में हिस्सा लेने के साथ खास तरह के पकवानों का लुफ्त उठाते हैं। इसके अलावा घर की महिलाएं लोक गीत गाती हैं। इस दौरान धरती माता को विश्राम देने की परंपरा निभाई जाती है।
