क्या आप जानते हैं? श्रीकृष्ण को विष पिलाने वाली पूतना पहले जन्म में थी राजकुमारी!

Putana Previous Birth: पूतना जिसे हम श्रीकृष्ण को मारने आई राक्षसी के रूप में जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूतना पिछले जन्म में एक राजकुमारी भी जिनको एक श्राप के कारण ये रूप लेना पड़ा।
Putana, who poisoned Lord Krishna, was a princess in her previous birth!
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Who Was Putana: भारतीय पुराणों में वर्णित कथाएं सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि गहरे रहस्य भी समेटे हुए हैं। ऐसी ही एक कथा है 'पूतना' की, जिसे हम श्रीकृष्ण को मारने आई राक्षसी के रूप में जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही पूतना अपने पूर्व जन्म में एक राजकुमारी थी? आइए जानते हैं इस रहस्यमयी प्रसंग की पूरी कहानी।

कंस की साजिश और गोकुल में पूतना का प्रवेश

जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब मथुरा का अत्याचारी राजा कंस भय से कांप उठा। भविष्यवाणी के अनुसार श्रीकृष्ण ही उसका वध करने वाले थे। इसी डर से कंस ने पूतना नामक राक्षसी को गोकुल भेजा। पूतना ने अपने स्तनों पर घातक विष का लेप लगाया और मासूम बालकों को मारने के इरादे से गोकुल पहुंची। वह नंद भवन में पहुंचकर बालकृष्ण को गोद में उठा लेती है और उन्हें स्तनपान कराने लगती है। लेकिन श्रीकृष्ण उसकी माया को पहचान लेते हैं। उन्होंने केवल दूध ही नहीं, बल्कि उसके प्राण भी खींच लिए। अंत समय में पूतना अपने भयानक रूप में आ गई, पर तब तक श्रीकृष्ण उसे निर्जीव कर चुके थे।

पूर्व जन्म में कौन थी पूतना?

पुराणों के अनुसार, पूतना पूर्व जन्म में रत्नमाला नाम की राजकुमारी थी। वह दैत्यराज राजा बलि की पुत्री थी। जब भगवान वामन देव ने राजा बलि को परखने के लिए वामन अवतार लिया, तब रत्नमाला भी वहां उपस्थित थी। बालक वामन की सुंदर और मोहक छवि देखकर उसके मन में ममत्व जाग उठा। उसने सोचा "यदि ऐसा मेरा पुत्र होता तो मैं उसे गोद में लेकर दुग्धपान कराती।" वामन देव उसके मन का भाव जान गए और "तथास्तु" कह दिया।

एक ही मन में जन्मे दो भाव

जब वामन देव ने तीन पग भूमि दान में मांगी और विराट रूप धारण कर लिया, तब उन्होंने एक पग में आकाश, दूसरे में पृथ्वी नाप ली और तीसरे पग में राजा बलि को पाताल भेज दिया। यह दृश्य देखकर रत्नमाला के मन में क्रोध भर गया। उसके मन में विचार आया "अगर ऐसा मेरा पुत्र होता तो मैं इसे विष देकर मार देती।" वामन देव ने उसके इस भाव को भी जान लिया और पुनः तथास्तु कह दिया।

कृष्णावतार में पूरी हुई भविष्यवाणी

इसी कारण द्वापर युग में रत्नमाला ने पूतना के रूप में जन्म लिया। उसे भगवान श्रीकृष्ण को स्तनपान कराने और विष देने, दोनों का अवसर मिला। इस प्रकार वामन देव के दोनों वरदान श्रीकृष्ण के अवतार में पूर्ण हुए। अंततः स्वयं नारायण के हाथों मृत्यु पाकर पूतना को मोक्ष की प्राप्ति हुई और वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो गई।

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